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हर्षा रिछारिया बनीं हर्षानंदगिरी, उज्जैन में लिया संन्यास और किया पिंडदान

उज्जैन से एक बड़ी खबर सामने आई है। हर्षा रिछारिया ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यासी जीवन में प्रवेश कर लिया है। दीक्षा लेने के बाद अब उनका नाम हर्षानंदगिरी हो गया है।

जानकारी के अनुसार, हर्षा रिछारिया ने महामंडलेश्वर सुमिनानंद महाराज से विधिवत दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा के साथ ही उन्होंने संन्यासी जीवन की शुरुआत करते हुए सांसारिक मोह-माया से दूरी बनाने का संकल्प लिया।

संन्यास की प्रक्रिया के तहत हर्षानंदगिरी ने एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी किया, जिसमें उन्होंने जीवित रहते हुए अपना पिंडदान किया। यह अनुष्ठान संन्यास परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जो व्यक्ति के पुराने जीवन से पूर्ण विरक्ति को दर्शाता है।

हर्षानंदगिरी ने अब पूरी तरह से संन्यासी जीवन का पालन करने और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है।