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ओपन स्कूल में खुले आम नकल, कार में बिठाकर करवाई गई नकल, वीडियो भी आया सामने

ओपन बोर्ड के परिणाम गुरुवार को जारी हो गए, लेकिन उससे पहले एक वीडियो ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। khabarjordar.com इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन इसमें साफ नजर आ रहा है कि दो छात्राएं कार में बैठकर पर्चा हल कर रही हैं और जब इस संदर्भ में जिला शिक्षा अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि इसकी शिकायत आई थी और उन्होंने इसका परीक्षण भी कराया था। उन्होंने सफाई दी कि बच्ची दिव्यांग थी, इसलिए कार में बैठकर परीक्षा दे रही थी। मामला अभनपुर स्थित बजरंग दास शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है।

यह है वीडियो में

वायरल हो रहे वीडियो में एक कार शाला भवन के सामने खड़ी हुई है। वीडियो में स्कूल का पूरा व्यू नजर आ रहा है। इस स्कूल को ओपन बोर्ड की दसवीं और बारहवीं परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था। अंदर छात्र पर्चे हल कर रहे हैं, जबकि कुछ विद्यार्थी कार में ही बैठकर उत्तर लिख रहे हैं। अन्य परीक्षार्थियों को केंद्र के भीतर ही प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान की गईं, जबकि वीडियो में दिख रहे परीक्षार्थियों को कार में ही लाकर उत्तरपुस्तिका और प्रश्नपत्र दिए गए। कार में बैठकर उनके द्वारा बगैर किसी पर्यवेक्षक के निरीक्षण के प्रश्नपत्र हल किए जा रहे हैं। वायरल वीडियो अंग्रेजी व गणित विषय के पर्चे के बताए जा रहे हैं।

दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए पृथक कक्ष का प्रावधान

सीबीएसई, माध्यमिक शिक्षा मंडल, राज्य ओपन बोर्ड सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में भी दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए नियम बने हुए हैं। दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा केंद्र में विशेष सुविधा उपलब्ध की जाती है। उन्हें रोल नंबर भूतल के कक्ष में ही आवंटित किया जाता है, ताकि चढ़ने-उतरने में उन्हें कोई परेशानी ना हो। दिव्यांग परीक्षार्थियों को भी पर्यवेक्षक की निगरानी में ही पर्चे हल करने होते हैं। उन्हें कार में बैठाकर परीक्षा हल करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है। नियमत: ये परीक्षा के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

जांच हो चुकी

पूरे मामले पर रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने कहा कि मामले की जांच हो चुकी है। कुछ दिनों पूर्व उन्हें यह वीडियो शिकायत के साथ प्रेषित किया गया था। जो बालिका कार में बैठी हुई है, वह दिव्यांग है। परीक्षा कक्ष के स्थान पर कार में ही पर्चे हल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चलने-फिरने में असक्षम होने के कारण उसे कार में ही बैठने दिया गया। दिव्यांग होने के कारण उसे लेखक की सुविधा प्रदान की गई थी। डीईओ का कहना है कि छात्रा के 100 फीसदी दिव्यांग होने का प्रमाण पत्र चिकित्सक द्वारा जारी किया गया था। कुल चार परीक्षार्थी थे, जिन्हें लेखक दिया गया था।