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साल की नौकरी में भी ग्रेच्युटी! जानिए नए लेबर कोड में किसे मिलेगा फायदा

1 साल की नौकरी में भी ग्रेच्युटी! जानिए नए लेबर कोड में किसे मिलेगा फायदा

देशभर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। 21 नवंबर 2025 से लागू हुए नए लेबर कोड ने पुराने नियमों में अहम संशोधन किया है, लेकिन इसके साथ ही कर्मचारियों के मन में कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अब हर कर्मचारी को सिर्फ 1 साल की नौकरी में ग्रेच्युटी मिल जाएगी? जवाब है—नहीं।

आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला।

🔹 किन कर्मचारियों को मिलेगा 1 साल में ग्रेच्युटी?

नए नियमों के तहत सबसे ज्यादा फायदा फिक्स्ड-टर्म (Fixed-term) और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को हुआ है।

ये वे कर्मचारी होते हैं जिन्हें कंपनियां तय समय (जैसे 1 या 2 साल) के अनुबंध पर नियुक्त करती हैं।

अब नया प्रावधान कहता है कि:

यदि कोई कर्मचारी अपना तय कॉन्ट्रैक्ट (कम से कम 1 साल) पूरा करता है,

तो वह ग्रेच्युटी का हकदार होगा

और यह भुगतान “आनुपातिक आधार” (Pro-rata basis) पर किया जाएगा

यानि अब उन्हें 5 साल तक इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।

🔹 परमानेंट कर्मचारियों के लिए क्या नियम है?

स्थाई (Permanent) कर्मचारियों के लिए नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

उन्हें अभी भी ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल की लगातार सेवा पूरी करनी होगी

हालांकि, मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में इस शर्त से छूट दी गई है

🔹 ग्रेच्युटी की रकम कैसे बढ़ेगी?

नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी की गणना का तरीका भी बदला गया है, जिससे कर्मचारियों को अधिक लाभ मिलेगा।

अब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके CTC का कम से कम 50% हो

पहले कंपनियां बेसिक सैलरी कम और भत्ते ज्यादा रखती थीं, जिससे ग्रेच्युटी कम बनती थी

अब बेसिक सैलरी बढ़ने से ग्रेच्युटी की राशि भी बढ़ेगी

🔹 कब से लागू होंगे ये नियम?

ये नए प्रावधान 21 नवंबर 2025 या उसके बाद नौकरी जॉइन करने वाले कर्मचारियों पर लागू होंगे।

यानि इस तारीख के बाद जो कर्मचारी कम से कम 1 साल की सेवा पूरी करेंगे, वही इन नए नियमों का लाभ ले पाएंगे।

🔹 जरूरी बात

अगर आप फिक्स्ड-टर्म, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी या फ्रीलांसर हैं और आपका एग्रीमेंट 1 साल का है, तो अब आप ग्रेच्युटी के लिए दावा कर सकते हैं।

कंपनियों को भी अब इन नए नियमों के अनुसार अपने वित्तीय प्रबंधन और बजट में बदलाव करना होगा।