JANJGIR CHAMPA NEWS. प्रसिद्ध कथावाचक पंडित अनिरुद्धाचार्य महाराज छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धर्मांतरण, गौहत्या, गौ तस्करी और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उनके बयानों ने एक बार फिर इन मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
धर्मांतरण को लेकर पंडित अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि धर्म छोड़ने से बड़ा कोई पाप नहीं है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर कोई रुपये या किसी अन्य लालच का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने का प्रयास करता है, तो इसकी शिकायत पुलिस से करनी चाहिए।
गौहत्या और गौ तस्करी पर सख्ती की मांग
पंडित अनिरुद्धाचार्य महाराज ने सरकार से गौहत्या और गौ तस्करी पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने की भी पैरवी की। उन्होंने कहा कि अगर मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया जा सकता है, तो गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता? उन्होंने इस विषय पर सरकार से गंभीरता से विचार करने की बात कही।
‘सनातन आपस में बैर करना नहीं सिखाता’
मजहब को लेकर पूछे गए सवाल पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि अक्सर कहा जाता है, ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना’, लेकिन उनके मुताबिक इसे इस तरह कहा जाना चाहिए कि ‘सनातन नहीं सिखाता आपस में बैर करना।’ उन्होंने आपसी प्रेम और सद्भाव की बात भी कही।
छत्तीसगढ़ के लोगों की तारीफ
छत्तीसगढ़ आने पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने प्रदेश के लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग प्रेम से भरे हुए और निश्छल हैं। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां के लोग छल-कपट, ईर्ष्या और द्वेष नहीं रखते।
मनुस्मृति और संविधान की तुलना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंडित अनिरुद्धाचार्य महाराज ने मनुस्मृति और संविधान की तुलना करते हुए भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति बलात्कार के दोषी को मृत्युदंड देने की बात करती है, जबकि संविधान के तहत आरोपी को जमानत मिल सकती है।