SURGUJA NEWS. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत केवरी ने नशे के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। गांव में शराब की वजह से बढ़ते विवाद और परिवारों पर पड़ रहे असर से परेशान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पूर्ण शराबबंदी का फैसला लिया है। 1 सितंबर से गांव में शराब बनाना, बेचना और पीना प्रतिबंधित रहेगा। इस अभियान में गांव की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से लिया फैसला
20 अगस्त को ग्राम पंचायत केवरी में बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरपंच मैनेजर राम, पूर्व सरपंच के प्रतिनिधि समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से शराबबंदी का प्रस्ताव पारित किया गया।
इस दौरान ‘नशा हटाओ, खुशियां लाओ’, ‘नशे से दूरी-जीवन जरूरी’ और ‘नशा छोड़ो-परिवार जोड़ो’ जैसे नारों के जरिए ग्रामीणों ने नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया। 31 अगस्त तक गांव में घर-घर जाकर लोगों को शराब के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया।
शराब बनाने और बेचने पर ₹5 हजार जुर्माना
शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम सभा ने अलग-अलग मामलों में आर्थिक दंड भी तय किया है।
- शराब बनाने पर ₹5,000 जुर्माना
- शराब बेचने पर ₹5,000 जुर्माना
- शराब पीने पर ₹1,500 जुर्माना
- शराब पीकर विवाद करने पर ₹3,000 जुर्माना
- दूसरे गांव से शराब पीकर आने पर ₹3,000 जुर्माना
ग्रामीणों ने यह भी तय किया है कि नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सामूहिक बहिष्कार का फैसला भी लिया जा सकता है।
शराबबंदी की निगरानी करेगी समिति
शराबबंदी के फैसले को लागू कराने के लिए ग्राम सुधार समिति का गठन किया गया है। पूर्व सरपंच के पति कुंतेय कुमार सिंह को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। समिति गांव में शराब बनाने, बेचने और पीने वालों पर नजर रखेगी।
महिलाओं ने संभाली नशे के खिलाफ कमान
इस अभियान में गांव की महिलाओं की भूमिका खास है। ग्राम सभा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। कई महिलाओं ने शराब की वजह से परिवार में हुए विवाद और परेशानियों को करीब से देखा है। इसी वजह से वे गांव को नशामुक्त बनाने के अभियान में सक्रिय रूप से सामने आई हैं।
फैसले के बाद गांव में मुनादी कराई गई और घर-घर जाकर लोगों को शराबबंदी के नियमों की जानकारी दी गई।
प्रशासन ने बताया स्वागत योग्य पहल
जनपद लखनपुर की सीईओ खुशबू शास्त्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में शराब बनाने को लेकर कुछ कानूनी प्रावधान हैं। हालांकि, ग्रामीण अगर स्वयं शराबबंदी का निर्णय ले रहे हैं तो यह स्वागत योग्य पहल है। उन्होंने कहा कि उन्हें केवरी में चल रहे अभियान की विस्तृत जानकारी अभी नहीं मिली है।
ग्राम पंचायत के सरपंच मैनेजर सिंह के मुताबिक, शराब के कारण गांव में आए दिन विवाद होते हैं और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी को देखते हुए ग्रामीणों ने मिलकर शराबबंदी का फैसला लिया है और लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।