Sawan 2026: भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाने वाला सावन का महीना आज से शुरू हो गया है। यह पावन मास 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। हिंदू धर्म में सावन का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। सावन के आते ही मंदिरों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजने लगते हैं। आइए जानते हैं पहले दिन जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त, सावन सोमवार की तिथियां, पूजा विधि और सावन में क्या करें और क्या नहीं।
सावन 2026: आज के जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आज कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक
प्रातः संध्या मुहूर्त: सुबह 4:39 बजे से 5:41 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:20 बजे से 1:12 बजे तक
विजय मुहूर्त: शाम 4:28 बजे से 5:29 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:30 बजे तक
सावन के पहले दिन बन रहे हैं कई शुभ योग
सावन के पहले दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। आज श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग, शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग और गुरु-आदित्य राजयोग का शुभ संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में की गई शिव उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है।
सावन सोमवार 2026 की तिथियां
सावन के चार सोमवार इस प्रकार हैं—
पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026
सावन में भगवान शिव की सरल पूजा विधि
सावन के दौरान सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। मंदिर या घर में स्थापित शिवलिंग पर तांबे के लोटे से शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत और शहद अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करें तथा “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। अंत में फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाकर शिव आरती करें।
सावन में क्या करें
प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
सात्विक भोजन का पालन करें।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।
पूरे महीने “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
सावन में क्या नहीं करें
मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और बासी भोजन का सेवन न करें।
बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से बचें।
किसी का अपमान न करें और घर में कलह से दूर रहें।
मन, वचन और कर्म से सात्विकता बनाए रखें।
सावन मास का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन वर्ष का पांचवां महीना होता है और इसे भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी महीने देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया था। मंथन से निकले हलाहल विष से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई, तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।
कहा जाता है कि विष की जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल और गंगाजल अर्पित किया। तभी से सावन के महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।