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प्लेन के पौवे से निकला कीड़ा, देखते ही शराबी के उड़े होश

Chhattisgarh News डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में शराब के प्लेन पौवे के भीतर कीउ़ा निकला है। डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम कटली के शासकीय कंपोजिट शराब दुकान से खरीदे गए देशी शराब के पौवे में कीड़ा तैरता हुआ पाए जाने का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि, सीलबंद पौवे के भीतर कीड़ा मौजूद है, जो सीधे-सीधे शराब की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

ना देख पाता तो क्या होता

Chhattisgarh News गनीमत यह रही कि जिस व्यक्ति ने यह शराब खरीदी थी, उसने सेवन करने से पहले पौवे को ध्यान से देखा और कीड़े को देखकर तुरंत उसका वीडियो बना लिया। यदि यह शराब पी ली जाती, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता था। पहले ही शराब को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, और उसमें कीड़े मिलना आम नागरिकों को ज़हर परोसने जैसा है।

नियमों की खुली अवहेलना

आबकारी अधिनियम एवं विभागीय नियमों के अनुसार-

  • शराब की प्रत्येक बोतल की गुणवत्ता जांच अनिवार्य है।
  • भंडारण स्थल स्वच्छ, नियंत्रित तापमान और सुरक्षित होना चाहिए।
  • किसी भी प्रकार की मिलावट या दूषित सामग्री पाए जाने पर तत्काल दुकान सील कर सैंपल जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का प्रावधान है।
  • लेकिन डोंगरगढ़ में ये सभी नियम केवल कागज़ों तक सीमित नजर आ रहे हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि आबकारी विभाग की सुस्ती और लापरवाही के चलते आम जनता की जान जोखिम में डाली जा रही है।

आबकारी विभाग का गैर-जिम्मेदार जवाब

Chhattisgarh News वहीं जब मीडिया ने इस पूरे मामले पर डोंगरगढ़ आबकारी उपनिरीक्षक अनिल सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने बिना जांच किए ही वीडियो को नकारते हुए कहा कि, वीडियो में दिख रहा बैकग्राउंड उनकी किसी भी शराब दुकान का नहीं है। अधिकारी शराब के बोतल को देख जाँच करने की जगह बैकग्राउंड से ही तय कर रहे हैं कि, हमारी दुकान की शराब नहीं है। जब मीडिया ने शराब की बोतल पर लगे होलोग्राम और QR कोड से ट्रेसिंग की बात उठाई, तो उपनिरीक्षक ने मामले की जांच करने के बजाय मीडिया को ही वायरल वीडियो के साथ उनके पास आने की नसीहत दे डाली। यह रवैया न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि विभाग की अड़ियल और बचाव वाली मानसिकता को भी उजागर करता है।

Chhattisgarh News डोंगरगढ़ आबकारी विभाग लचर कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में

बहरहाल, यह कोई पहला मामला नहीं है जब डोंगरगढ़ आबकारी विभाग अपनी लचर कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में आया हो। इससे पहले ग्राम करवारी में मध्यप्रदेश निर्मित बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब डंप किए जाने के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर तत्कालीन आबकारी प्रभारी को निलंबित किया जा चुका है।

आबकारी विभाग की सुस्त नीति पर सवाल

अब सवाल यह है कि, जब मामला सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा है, तो क्या इस बार भी आबकारी विभाग अपनी पुरानी सुस्त और बचाव वाली नीति पर कायम रहेगा, या फिर उच्च अधिकारी जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई कर जनता का भरोसा बहाल करेंगे? देखना यह होगा कि, शासन और प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।