Chhattisgarh News: रायपुर, 13 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा समेत लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान हो गया है। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ और सर्व शिक्षक संघ ने सरकार को 5 सितंबर तक ठोस निर्णय लेने का समय दिया है। इसके बाद 9 सितंबर से आंदोलन को अनिश्चितकालीन और निर्णायक चरण में ले जाने की घोषणा की गई है।
बुधवार को शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने डीपीआई पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात की और सेवा सुरक्षा समेत अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया। बैठक के बाद संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का खाका सामने रखा।
आंदोलन में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक मनीष मिश्रा, फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर, नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत और सर्व शिक्षक संघ के प्रदीप पांडेय शामिल रहे। कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने भी शिक्षकों की मांगों का समर्थन किया।
5 सितंबर तक फैसला, नहीं तो 9 सितंबर से आर-पार
शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि 5 सितंबर शिक्षक दिवस तक सरकार की ओर से सेवा सुरक्षा सहित प्रमुख मांगों पर ठोस घोषणा नहीं हुई तो आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगा।
संगठनों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी। शिक्षकों की मांगों पर सरकार को स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना होगा।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
* शिक्षकों को सेवा सुरक्षा दी जाए।
* सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर की जाए।
* प्रथम नियुक्ति/पूर्व सेवा की गणना की जाए।
* पुरानी सेवा की गणना के आधार पर पुरानी पेंशन सहित सभी पात्र लाभ दिए जाएं।
* शिक्षकों से जुड़े लंबित मामलों पर विभागीय स्तर पर ठोस निर्णय लिया जाए।
17 अगस्त से आंदोलन की पहली बड़ी टक्कर
आंदोलन का पहला बड़ा पड़ाव 17 अगस्त को होगा। बेमेतरा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी सेवा सुरक्षा संबंधी आदेश के विरोध में शिक्षक संगठन डीईओ कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके बाद आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तार देने की तैयारी है।
22 अगस्त को पूरे प्रदेश के ब्लॉक में शक्ति प्रदर्शन
22 अगस्त को प्रदेश के सभी विकासखंडों में एकदिवसीय धरना, रैली और प्रदर्शन होगा। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को शिक्षकों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
29 अगस्त को 33 जिलों में एक साथ आवाज
आंदोलन का अगला बड़ा चरण 29 अगस्त को होगा। प्रदेश के सभी 33 जिलों में रैली और धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
शिक्षक संगठनों का दावा है कि चरणबद्ध आंदोलन के जरिए सरकार को मांगों पर निर्णय लेने का पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है।
30 अगस्त से सोशल मीडिया पर सरकार को घेरने की तैयारी
सड़क के साथ अब सोशल मीडिया पर भी मोर्चा खोलने की तैयारी है। 30 अगस्त से 4 सितंबर तक सोशल मीडिया अभियान चलाया जाएगा।
इस अभियान के जरिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, राज्य सरकार और शिक्षा विभाग तक शिक्षकों की मांग पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
5 सितंबर पर टिकी नजर, 9 सितंबर से बड़ा फैसला
शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर को शिक्षक संगठन सरकार की घोषणा का इंतजार करेंगे।
लेकिन अगर इस दिन सेवा सुरक्षा सहित अन्य मांगों पर कोई ठोस सकारात्मक निर्णय नहीं आता है, तो 9 सितंबर से आंदोलन को अनिश्चितकालीन करने का ऐलान किया गया है।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के आवास तक पहुंचेगा आंदोलन
9 सितंबर से आंदोलन केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षक संगठनों ने ‘सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा’ निकालने का ऐलान किया है।
योजना के मुताबिक—
बिलासपुर और सरगुजा संभाग के शिक्षक कुनकुरी में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।
वहीं, बस्तर, दुर्ग और रायपुर संभाग के शिक्षक दुर्ग में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के आवास का घेराव करेंगे।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री के पैतृक क्षेत्र बगिया कैंप, जशपुर और शिक्षा मंत्री के दुर्ग स्थित आवास तक ‘सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा’ निकाले जाने की बात कही गई है।
शिक्षक नेताओं के मुताबिक, मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
मनीष मिश्रा बोले- शिक्षक दिवस पर मिले ‘सेवा सुरक्षा’ की सौगात
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक मनीष मिश्रा ने कहा कि शिक्षक लंबे समय से सेवा सुरक्षा सहित अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान का दिन है और सरकार को इसी दिन शिक्षकों के हित में ठोस घोषणा करनी चाहिए।
मिश्रा ने कहा, “हमारी मांग है कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को मोदी की गारंटी के अनुरूप सेवा सुरक्षा की सौगात दी जाए।”
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में निर्णय नहीं लेती है तो शिक्षक आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने के लिए मजबूर होंगे।
उनके मुताबिक, 9 सितंबर से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के आवास तक सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा की जाएगी और मांग पूरी होने तक शिक्षक वहां बैठकर अपना निवेदन जारी रखेंगे।
रविंद्र राठौर बोले- अब आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि सेवा सुरक्षा शिक्षकों से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक लगातार अपनी मांगों को शासन और विभाग के सामने रखते आए हैं, लेकिन अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
सरकार को सेवा सुरक्षा, वेतन विसंगति और पुरानी सेवा की गणना जैसे मुद्दों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
विकास राजपूत- सरकार को दिया जा रहा पर्याप्त समय
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि शिक्षक संगठनों ने पहले भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें शासन तक पहुंचाई हैं।
उन्होंने कहा कि 17 से 29 अगस्त तक अलग-अलग स्तर पर आंदोलन के जरिए सरकार को पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है। इसके बाद 5 सितंबर तक सकारात्मक निर्णय की उम्मीद रहेगी।
यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाना शिक्षकों की मजबूरी होगी।
प्रदीप पांडेय- सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने की तैयारी
सर्व शिक्षक संघ के प्रदीप पांडेय ने कहा कि सेवा सुरक्षा का मुद्दा किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में शिक्षक इससे प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से अलग-अलग शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाकर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की गई है।
पांडेय के मुताबिक, 5 सितंबर तक सरकार निर्णय लेती है तो आंदोलन टल सकता है, लेकिन ठोस पहल नहीं हुई तो 9 सितंबर से आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा।
आंदोलन का पूरा प्लान
17 अगस्त — बेमेतरा DEO कार्यालय का घेराव
22 अगस्त — सभी ब्लॉक में धरना, रैली और ज्ञापन
29 अगस्त — प्रदेश के सभी 33 जिलों में रैली और धरना
30 अगस्त–4 सितंबर — सोशल मीडिया अभियान
5 सितंबर — शिक्षक दिवस पर सरकार की घोषणा का इंतजार
9 सितंबर — मांग पूरी नहीं होने पर निर्णायक आंदोलन
9 सितंबर से — ‘सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा’ और अनिश्चितकालीन आंदोलन
अब गेंद सरकार के पाले में
शिक्षक संगठनों ने आंदोलन का पूरा रोडमैप सामने रखते हुए 5 सितंबर तक सरकार को निर्णय का मौका दिया है। इसके बाद 9 सितंबर से आंदोलन को अनिश्चितकालीन करने की घोषणा की गई है।
हालांकि, सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक संगठनों की मांगों तथा इस आंदोलन के ऐलान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।