गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : पेण्ड्रारोड की द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने खेत की रखवाली के लिए अवैध रूप से करंट प्रवाहित तार बिछाने वाले स्वरूप सिंह धुर्वे को एक बच्चे की मौत का दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 105 (भाग-2) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त तीन महीने का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
खेलते समय करंट की चपेट में आया था मासूम
मामला 28 अगस्त 2025 का है। दोपहर करीब 2:30 बजे मरवाही क्षेत्र के करगीकला नदिया टोला में गीतराम सारथी नामक बालक अपने साथियों के साथ एक गणेश पंडाल के पास खेल रहा था। पंडाल से करीब 50 मीटर दूर आरोपी स्वरूप सिंह धुर्वे का मकान और बाड़ी स्थित है।
आरोपी ने खेती-बाड़ी की रखवाली के लिए बिजली विभाग की अनुमति के बिना अपने घर से अवैध रूप से तार खींचकर खेत के आसपास झटका तार लगाया था और उसमें सीधे बिजली प्रवाहित कर दी थी। खेलते-खेलते गीतराम उसी तार की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बचाव पक्ष ने मांगी थी रियायत
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत से कहा कि यह आरोपी का पहला अपराध है, इसलिए उसे न्यूनतम सजा दी जाए। वहीं अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा की मांग की।
अदालत ने कहा- परिणामों से था पूरी तरह अवगत
अदालत ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी अच्छी तरह जानता था कि खुले विद्युत तार में करंट प्रवाहित करने से किसी भी व्यक्ति या जीव की मौत हो सकती है। इसके बावजूद उसने ऐसा किया, जिससे एक मासूम की जान चली गई।
न्यायालय ने इस कृत्य को हत्या की श्रेणी में न आने वाला आपराधिक मानव वध मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने पैरवी की।