Chhattisgarh High Court: महिलाओं के प्रॉपर्टी अधिकारों को मजबूत करने वाला एक अहम फैसला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि ज़ुबानी बंटवारे का बहाना बनाकर बेटी को उसके कानूनी हिस्से से पुश्तैनी संपत्ति से नहीं रोका जा सकता है. जस्टिस बिभू दत्ता गुरु ने शुक्रवार को यह आदेश सुनाया और दो निचली अदालतों के फैसले रद्द कर दिए. उन अदालतों ने एक महिला के पिता की जमीन पर दावे को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वह कानून का गलत इस्तेमाल कर रही है. हाई कोर्ट ने विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बेटियों को भी बराबर के विरासत अधिकार मिलते हैं.
बेटी जन्म से ही संपत्ति में हिस्सेदार
Chhattisgarh High Court: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अनुसार, बेटी जन्म से ही संपत्ति में हिस्सेदार होती है और उसे बेटे की तरह ही अधिकार मिलते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ 20 दिसंबर, 2004 से पहले किए गए रजिस्टर्ड डीड या कोर्ट के आदेश वाले बंटवारे ही वैध माने जाएंगे. ज़ुबानी बंटवारा या बिना रजिस्ट्रेशन वाला पारिवारिक इंतजाम बेटी के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता है. यह केस राजनांदगांव की अमरिका बाई का था. उन्होंने अपने दिवंगत पिता धनुक लोधी की खेती की जमीन का बंटवारा मांगा. उनका दावा था कि यह पुश्तैनी संपत्ति है और वह क्लास-I वारिस के तौर पर इसके हकदार हैं.
Chhattisgarh High Court: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अनुसार, बेटी जन्म से ही संपत्ति में हिस्सेदार होती है और उसे बेटे की तरह ही अधिकार मिलते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ 20 दिसंबर, 2004 से पहले किए गए रजिस्टर्ड डीड या कोर्ट के आदेश वाले बंटवारे ही वैध माने जाएंगे. ज़ुबानी बंटवारा या बिना रजिस्ट्रेशन वाला पारिवारिक इंतजाम बेटी के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता है. यह केस राजनांदगांव की अमरिका बाई का था. उन्होंने अपने दिवंगत पिता धनुक लोधी की खेती की जमीन का बंटवारा मांगा. उनका दावा था कि यह पुश्तैनी संपत्ति है और वह क्लास-I वारिस के तौर पर इसके हकदार हैं.
ज़ुबानी बंटवारा मान्य नहीं
Chhattisgarh High Court
Chhattisgarh High Court: धनुक की दूसरी पत्नी और उनके बेटे दलील दे रहे थे कि पहले ही एक ज़ुबानी बंटवारा हो चुका है, जिसमें अमरिका को सिर्फ मेंटेनेंस के लिए एक एकड़ जमीन और घर का हिस्सा मिला था. हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मेंटेनेंस के लिए दिया गया हिस्सा आखिरी बंटवारा नहीं है. ज़ुबानी बंटवारा तब तक मान्य नहीं है जब तक वह किसी पब्लिक डॉक्यूमेंट या कोर्ट के आदेश से साबित न हो. कोर्ट ने आखिर में अमरिका को उनके कानूनी हिस्से का हकदार माना और आदेश दिया कि संपत्ति उसी के अनुसार बांटी जाए




