CHHATITSGARH HIGH COURT बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल मेरिट सूची में नाम शामिल होने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। यदि सक्षम प्राधिकारी पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर देता है, तो मेरिट सूची में शामिल उम्मीदवार भी नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।
यह मामला सूरजपुर जिले में ग्राम पंचायत सचिव भर्ती से जुड़ा है। रामानुजनगर निवासी देवेंद्र कुमारी साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वर्ष 2018 में जिला पंचायत सूरजपुर ने ग्राम पंचायत सचिव के 11 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया के बाद उनका नाम मेरिट सूची में शामिल हुआ, लेकिन सात वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंचायत निदेशक से भर्ती लंबित रहने का कारण पूछा। राज्य शासन ने अदालत को बताया कि भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले राज्य सरकार और वित्त विभाग की आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई थी। इस कारण भर्ती प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई और पंचायत निदेशालय के निर्देश पर जिला पंचायत सूरजपुर ने 22 अक्टूबर 2025 को पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी।
राज्य का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि जब पूरी चयन प्रक्रिया ही वैधानिक रूप से रद्द कर दी गई है, तब केवल मेरिट सूची में नाम होने के आधार पर नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।