छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना इलाके में 17 साल के नाबालिग ने 7 साल की दो बच्चियों के साथ चॉकलेट देने के बहाने रेप किया है। उनके साथ मारपीट भी की। जब परिजनों ने उसे रंगे हाथों पकड़ा, तो लड़का भाग गया।
वहीं पीड़ित बच्चियों की मां ने पुलिस वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत के बाद लड़के को पकड़ने की बजाय पुलिस वाले उसकी मां से बातचीत करने में लगे थे। लड़के की मां ने पुलिस को 10-20 हजार रुपए देने की पेशकश की थी। जब गिरफ्तारी में देरी पर आपत्ति जताई गई, तब पुलिस लड़के को लेकर गई।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही, सबूत नहीं जुटाने, FIR में देरी, लड़के को वीआईपी सुविधा देने और समझौते के लिए मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इसे लेकर SSP रजनेश सिंह से मिलकर शिकायत की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय गृहमंत्री को भी पत्र लिखा गया है।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
पीड़िता बच्चियों के परिजनों के मुताबिक, नाबालिग लड़का चॉकलेट खिलाने के नाम पर पिछले कई दिनों से बच्चियों के साथ गलत हरकत कर रहा था। 27 मई को परिजनों ने उसे देख लिया। उसने गलत काम करते समय बच्चियों को रस्सी से बांधकर रखा था। 29 मई को आरोपी की गिरफ्तारी हुई, लेकिन पुलिस ने सबूत जब्त नहीं किया।
वारदात से जुड़े सामान (रस्सी सहित अन्य वस्तुएं) और संभावित सबूतों की जानकारी पुलिस को तत्काल दी गई थी। उन्हें तुरंत जब्त करने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद सिरगिट्टी पुलिस ने इन महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। जिससे सबूतों के नष्ट होने की पूरी आशंका है।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई FIR
घटना की जानकारी देने के बाद भी सिरगिट्टी पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज नहीं की। पीड़ित परिवार सुबह से देर रात तक थाने और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई।
बच्चियों को पूछताछ से मानसिक प्रताड़ना
आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद बच्चियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उनके निजी अंगों में दर्द होने की पुष्टि हुई और संकेत मिले। इसके बावजूद पुलिस मामले को शुरू से ही कमजोर करने की कोशिश कर रही है। मासूम बच्चियों से बार-बार पूछताछ कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। पुलिस ने आरोपी का मेडिकल ‘नील’ कर दिया है।
पुलिस पर समझौता करने दबाव बनाने का आरोप
पीड़ित बच्ची की मां का कहना है कि, थाना प्रभारी और जांच अधिकारी केस की निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले को ‘दिशा बदलने’ और ‘समझौता’ करने का दबाव बना रहे हैं। पुलिस पीड़ित पक्ष से कह रही है कि, आरोपी पड़ोसी और परिचित है, इसलिए मामले को यहीं समाप्त कर लेना चाहिए। जिससे पीड़ित परिवार का मनोबल टूट रहा है।
आरोपी पक्ष को वीआईपी ट्रीटमेंट
पीड़ित पक्ष ने ये भी कहा कि थाने में आरोपी की मां को बैठाकर रखा गया है और उन्हें पुलिस की तरफ से विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने टीआई और स्टाफ पर आरोपी को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पुलिस पीड़ित पक्ष को धूप में बिठाती है, जबकि आरोपी के साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है। उसके परिवार के लोग उससे तीन-तीन बार मिलने आ रहे हैं।
जिससे जांच की पारदर्शिता संदिग्ध हो गई है। आरोपी पक्ष की तरफ से पीड़ित परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिससे बच्चियों और पूरे परिवार की जान-माल की सुरक्षा को लेकर भय का वातावरण बन गया है।
पीड़ित परिवार की 7 मांगें
इस केस की जांच किसी वरिष्ठ और स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए।
घटना से संबंधित सभी संभावित सबूत, वस्तुएं और सामग्रियां तत्काल जब्त कर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और साक्ष्य संकलन में बरती गई लापरवाही की अलग से जांच हो।
थाना प्रभारी सिरगिट्टी अभय सिंह बैस, उप निरीक्षक शीतल प्रसाद त्रिपाठी और जांच अधिकारी संतोषी अग्रवाल की भूमिका की विभागीय जांच कराई जाए। इन्हें जिम्मेदार पद से हटाया जाए।
जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को इस केस से पूरी तरह अलग किया जाए।
पीड़ित बच्चियों और उनके परिवार को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए।
इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध विवेचना सुनिश्चित कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।