BASTAR NEWS. छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भारी बारिश और बाढ़ के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों में जिंदगी अब भी पटरी पर नहीं लौट पाई है। सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और बस्तर जिलों के कई इलाकों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब तबाही की तस्वीर साफ नजर आ रही है। कई मकान ढह गए हैं, खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है और बड़ी संख्या में ग्रामीण अब भी सड़क, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की बहाली का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
इंद्रावती नदी के उफान ने बढ़ाई मुश्किल
भारी बारिश के साथ उड़ीसा की ओर से बांधों से छोड़े गए पानी के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। छत्तीसगढ़-उड़ीसा सीमा से लगे बस्तर के कई गांवों में पानी घुस गया। नगरनार क्षेत्र के आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया और कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए। भेजापदर, नगरनार और नदी बोड़ना सहित प्रभावित क्षेत्रों में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आया। बाढ़ की वजह से कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। ग्रामीणों के सामने घर और मवेशियों को बचाने के साथ-साथ जरूरी सामान सुरक्षित रखने की भी बड़ी चुनौती रही।
सैकड़ों लोगों का किया गया रेस्क्यू
बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF, NDRF और प्रशासन की टीमों ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर बनाए गए, जहां खाने और रहने की व्यवस्था की गई। जगदलपुर के डोंगा घाट क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हो गए थे। नदी के पानी से घिरे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली गई और लोगों को एयरलिफ्ट किया गया।जगदलपुर शहर के 48 में से 10 वार्ड बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए। पानी उतरने के बाद कई घरों में मलबा, गंदगी और कचरा जमा है।
1.25 लाख हेक्टेयर फसल पर बाढ़ की मार
बाढ़ ने सबसे बड़ा नुकसान किसानों को पहुंचाया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसल प्रभावित हुई है। कई किलोमीटर तक खेतों में पानी भरा हुआ है। जहां कुछ दिन पहले तक फसलें लहलहा रही थीं, वहां अब पानी ही पानी नजर आ रहा है। फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।बारिश थमने के करीब 48 घंटे बाद भी कई खेतों में पानी जमा रहा, जिससे नुकसान का आकलन करना भी चुनौती बना हुआ है।
3500 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त
बस्तर संभाग में बाढ़ ने सिर्फ खेतों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि बड़ी संख्या में घर भी इसकी चपेट में आए हैं। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 3500 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई परिवारों के घरों में पानी और मलबा भर गया। कुछ जगहों पर घरों की दीवारें और दूसरे निर्माण ढह गए। लोग अब अपने घरों की सफाई और मरम्मत में जुटे हैं।
150 से ज्यादा गांव अब भी प्रभावित
बाढ़ के दौरान बस्तर संभाग के कई इलाके करीब दो दिनों तक टापू में तब्दील रहे। पानी कम होने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। करीब 150 से ज्यादा गांवों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कई ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क अब भी बहाल नहीं हो पाया है। बिजली व्यवस्था भी कई जगहों पर प्रभावित है। सड़क, बिजली के खंभों और दूसरी सरकारी संपत्तियों को भी बाढ़ के कारण नुकसान पहुंचा है।
अब राहत और पुनर्वास की चुनौती
पानी का स्तर कम होने के बाद प्रशासन के सामने अब प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और पुनर्वास की चुनौती है। कई इलाकों में लोगों को खाने-पीने की सामग्री, साफ पानी और जरूरी सामान की जरूरत है। प्रशासन के साथ स्थानीय समाजसेवी संगठन और आम लोग भी प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हुए हैं।