BASTAR DUSSEHRA. छत्तीसगढ़ का विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा इस साल खास वजहों से चर्चा में है। इस बार सुकमा, बीजापुर और अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ इलाकों के करीब 50 गांवों के देवी-देवता इस ऐतिहासिक पर्व में शामिल हुए हैं। लंबे समय तक सुरक्षा और आवागमन की चुनौतियों के कारण इन क्षेत्रों की भागीदारी सीमित रही थी। अब बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने आराध्य देवी-देवताओं के साथ जगदलपुर पहुंचे हैं।
नक्सल प्रभावित इलाकों से बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण
इस वर्ष बस्तर दशहरा में दूरस्थ गांवों की भागीदारी ने उत्सव की भव्यता बढ़ा दी है। आयोजनों से जुड़े पटवारी सत्यनारायण सेठिया के मुताबिक, अबूझमाड़ सहित सुकमा और बीजापुर के कई गांवों के देवी-देवता इस बार बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी देवी-देवताओं को उत्सव में लाया गया है।
बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बताया कि करीब 50 ऐसे गांवों के लोग इस बार पर्व में शामिल हुए हैं, जिनकी भागीदारी पहले मुश्किल थी। सड़कों से लेकर आयोजन स्थलों तक लोगों का उत्साह देखने को मिल रहा है।
954 देवी-देवताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई पर्व की भव्यता
बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्मों में भी बड़ी भागीदारी दर्ज की गई। मौली परगांव अनुष्ठान में 954 देवी-देवता शामिल हुए, जबकि भीतर रैनी की रस्म में 461 देवी-देवताओं की उपस्थिति रही। इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
मुरिया दरबार में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
बस्तर दशहरा के कार्यक्रमों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जगदलपुर दौरा भी निर्धारित है। तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति सुबह 11:15 बजे जगदलपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगी। इसके बाद मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। राष्ट्रपति सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगी। इसके बाद वह लालबाग मैदान में आयोजित आमसभा को संबोधित करेंगी।
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण पारंपरिक रस्म है। इसे आदिवासी समाज की ऐतिहासिक सभा और स्थानीय जनजीवन से जुड़े मुद्दों को सामने रखने वाले मंच के रूप में भी जाना जाता है।
देश-विदेश से पहुंच रहे पर्यटक
बस्तर दशहरा में इस बार छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों और विदेशों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। दूरस्थ गांवों के देवी-देवताओं की बढ़ी भागीदारी और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी है।