रायपुर। रायपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में एक निजी रिहायशी सोसायटी का कथित अमानवीय चेहरा सामने आया है। आरोप है कि सोसायटी प्रबंधन ने एक गरीब परिवार को मुआवजे और आर्थिक सहायता का भरोसा देकर न केवल एक मजदूर की मौत का मामला दबाए रखा, बल्कि करंट हादसे में घायल हुए अन्य चार लोगों को भी न्याय से वंचित कर दिया। छह महीने बीत जाने के बाद भी मृतक के परिवार को न मुआवजा मिला और न ही जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। अब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।

क्रेस्ट ग्रीन्स सोसायटी में हुआ था हादसा
मामला रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के वेस्ट जोन स्थित सरस्वती नगर थाना क्षेत्र की क्रेस्ट ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसायटी का है। यहां एस. तुफान, पुनाराम, मलनेश, नारायण साहू और धनश्याम माली का काम करते थे। 1 दिसंबर को सोसायटी परिसर में काम के दौरान धातु की सीढ़ी बिजली के खुले तार की चपेट में आ गई। करंट लगने से पांचों मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए।

इस हादसे में एस. तुफान लगभग 80 प्रतिशत तक झुलस गए, जबकि अन्य चार मजदूर भी करीब 40 प्रतिशत तक घायल हुए।


मुआवजे का भरोसा देकर शिकायत दर्ज कराने से रोका गया
मृतक एस. तुफान की पत्नी गायत्री ने अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि हादसे के बाद सोसायटी के पदाधिकारियों ने परिवार पर लगातार दबाव बनाया और पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करने के लिए समझाइश दी। परिवार को आश्वासन दिया गया कि 20 लाख रुपये का मुआवजा, आर्थिक सहायता और भविष्य में नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार ने इन आश्वासनों पर भरोसा कर लिया और तत्काल पुलिस शिकायत नहीं की। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो मुआवजा मिला और न ही किसी प्रकार की सहायता। आरोप है कि अब सोसायटी के पदाधिकारी परिवार से संपर्क तक नहीं कर रहे हैं।
इलाज का आश्वासन, फिर मौत और टूटे वादे
हादसे के बाद एस. तुफान को पहले एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया। बाद में उन्हें पचपेड़ी नाका स्थित कालड़ा बर्न सेंटर ले जाया गया। अन्य घायलों का भी उपचार कराया गया।
गंभीर रूप से झुलसे एस. तुफान ने इलाज के दौरान 6 दिसंबर को दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि मौत के बाद भी सोसायटी प्रबंधन ने उन्हें भरोसा दिलाया कि परिवार को आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया जाएगा।
गायत्री ने पदाधिकारियों को बताया था कि उनके पति ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और परिवार पर लगभग 8 लाख रुपये का कर्ज है। उन्हें आश्वासन दिया गया कि परिवार की मदद की जाएगी। इसी भरोसे के बीच अगले दिन एस. तुफान का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

परिजनों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के बाद सोसायटी प्रबंधन की नीयत बदल गई और सभी वादे हवा हो गए।
अंतिम संस्कार के बाद बदल गया रवैया
पीड़ित परिवार का कहना है कि हादसे के बाद सोसायटी प्रबंधन पुलिस कार्रवाई से बचना चाहता था। यदि तत्काल शिकायत होती तो सोसायटी पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती थी। इसलिए इलाज और मुआवजे का झांसा देकर परिवार को पुलिस थाने जाने से रोका गया।
मौत के बाद भी परिवार को भरोसे में रखा गया, लेकिन जैसे ही अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, सोसायटी प्रबंधन ने दूरी बना ली। महीनों तक न्याय नहीं मिलने पर परिवार ने आखिरकार रायपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर अपनी पीड़ा सार्वजनिक की।
एफआईआर और कड़ी कार्रवाई की मांग
मृतक और घायलों के परिजनों का कहना है कि वे गंभीर आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। उनका आरोप है कि सोसायटी प्रबंधन की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ और बाद में उन्हें झूठे आश्वासनों से गुमराह किया गया।
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का अनुचित लाभ लेना नहीं, बल्कि मृतक एस. तुफान को न्याय दिलाना और दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कराना है, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
परिजनों ने क्रेस्ट ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसायटी, कोटा रोड, रायपुर के पदाधिकारियों विनय अग्रवाल (अध्यक्ष), शंकर बजाज (उपाध्यक्ष), योगेश अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, महेंद्र तलरेजा एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 101, 106, 125, 238, 61(2) सहपठित धारा 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
डीसीपी बोले – बिना किसी दबाव के होगी कार्रवाई
रायपुर कमिश्नरेट वेस्ट जोन के डीसीपी संदीप पटेल ने बताया कि मृतक परिवार की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले को जांच के लिए संबंधित थाने को भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा, “पूरा मामला हमारे संज्ञान में है। जांच की जा रही है। तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। दोषियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कार्रवाई होगी। यह भी जांच की जाएगी कि मर्ग कायम क्यों नहीं हुआ और अस्पताल की ओर से पुलिस को सूचना दी गई थी या नहीं।”
कालड़ा अस्पताल का पक्ष
कालड़ा अस्पताल के संचालक डॉ. सुनील कालड़ा ने बताया कि एस. तुफान की मृत्यु के बाद संबंधित थाना पुलिस को सूचना दे दी गई थी। उन्हें जानकारी मिली थी कि परिजन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाहते थे।