कुछ साल पहले तक करीब 10 हजार रुपये के बजट में स्मार्टफोन खरीदने वालों के पास कई विकल्प मौजूद थे। इस कीमत में 5G कनेक्टिविटी, बड़ी बैटरी, ठीक-ठाक कैमरा और रोजमर्रा के काम के लिए पर्याप्त परफॉर्मेंस वाला फोन आसानी से मिल जाता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। करीब 10 हजार रुपये के बजट में नया 5G स्मार्टफोन ढूंढना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है। अगर ग्राहक को अच्छी स्क्रीन, कैमरा, पर्याप्त RAM, ज्यादा स्टोरेज और बड़ी बैटरी का कॉम्बिनेशन चाहिए, तो बजट अक्सर 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच रहा है।
सवाल है कि आखिर स्मार्टफोन इतने महंगे क्यों हो रहे हैं? क्या कंपनियों की लागत वाकई बढ़ गई है या फिर AI के नाम पर ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं?
इस बदलाव को समझने के लिए सबसे पहले स्मार्टफोन की RAM और स्टोरेज की कीमत को समझना जरूरी है।
RAM और स्टोरेज ने बदला पूरा गणित
स्मार्टफोन में RAM और स्टोरेज के लिए DRAM और NAND जैसी मेमोरी का इस्तेमाल होता है। पिछले कुछ समय में इन मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 में मेमोरी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग लागत पर पड़ा है। खासतौर पर बजट स्मार्टफोन में मेमोरी अब हार्डवेयर लागत का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कम कीमत वाले स्मार्टफोन में समान कॉन्फिगरेशन वाले मॉडल की बिल ऑफ मैटेरियल्स लागत में करीब 70 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसमें मेमोरी की बढ़ती कीमत की बड़ी भूमिका है।इसका सीधा मतलब है कि कंपनियों के लिए पहले वाली कीमत पर उसी तरह का हार्डवेयर देना अब पहले जितना आसान नहीं रहा।लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल आता है कि मेमोरी अचानक इतनी महंगी क्यों हो गई?
AI की वजह से बढ़ी मेमोरी की डिमांड
यहीं से स्मार्टफोन की कहानी में AI की एंट्री होती है।
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी टेक कंपनियां AI मॉडल को ट्रेन और रन करने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर तैयार कर रही हैं। इन डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले सर्वर को सामान्य कंप्यूटर की तुलना में काफी ज्यादा और तेज मेमोरी की जरूरत होती है। खास तौर पर हाई-बैंडविड्थ मेमोरी और सर्वर मेमोरी की मांग तेजी से बढ़ी है। मेमोरी बनाने वाली कंपनियों के लिए डेटा सेंटर और AI अब बड़े बाजार बन चुके हैं। जैसे-जैसे इस सेक्टर में मांग बढ़ी, मेमोरी की सप्लाई पर दबाव आया और कीमतें बढ़ने लगीं।
इसका असर स्मार्टफोन तक एक चेन के जरिए पहुंचता है।
AI डेटा सेंटर बढ़े → मेमोरी की मांग बढ़ी → मेमोरी महंगी हुई → फोन बनाने की लागत बढ़ी → स्मार्टफोन की कीमत पर दबाव आया।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनियां सिर्फ AI का नाम लेकर फोन महंगे कर रही हैं। मेमोरी की कीमत बढ़ना वास्तविक लागत का मुद्दा है।लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि स्मार्टफोन की हर कीमत बढ़ोतरी के लिए सिर्फ AI को जिम्मेदार माना जाए।
क्या कंपनियां AI की आड़ में ज्यादा पैसे ले रही हैं?
स्मार्टफोन की कीमत सिर्फ RAM और स्टोरेज से तय नहीं होती। प्रोसेसर, डिस्प्ले, कैमरा, बैटरी, सॉफ्टवेयर, रिसर्च, मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स, रिटेल मार्जिन और कंपनी का मुनाफा भी अंतिम कीमत का हिस्सा होते हैं। इसलिए किसी कंपोनेंट की लागत बढ़ने पर कंपनी के पास कई विकल्प होते हैं। वह अपना मार्जिन कम कर सकती है, दूसरे खर्चों में कटौती कर सकती है, फोन के हार्डवेयर में बदलाव कर सकती है या फिर कीमत बढ़ा सकती है।यही वजह है कि मेमोरी महंगी होने को स्मार्टफोन की हर कीमत बढ़ोतरी का अकेला कारण नहीं माना जा सकता।
₹15 हजार से कम वाले फोन सबसे ज्यादा दबाव में
भारत के स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर बजट सेगमेंट में दिखाई दे रहा है।काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर 10 फीसदी कम हुई। वहीं, 15 हजार रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में गिरावट करीब 45 फीसदी रही। यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में ग्राहक इसी बजट में फोन खरीदते हैं।
कीमत बढ़ने पर इन ग्राहकों के सामने आमतौर पर तीन रास्ते होते हैं—फोन खरीदने का फैसला टालना, पुराने फोन को ज्यादा समय तक चलाना या फिर ज्यादा पैसे खर्च करके अगली प्राइस कैटेगरी में जाना।यही वजह है कि करीब 10 हजार रुपये में नया 5G फोन ढूंढना अब पहले की तुलना में मुश्किल हो गया है।
Vivo की T सीरीज से समझिए बदलाव
Vivo की T सीरीज इसका एक उदाहरण है। 2025 में लॉन्च हुआ Vivo T4 Lite 5G करीब 9,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर आया था। वहीं 2026 में लॉन्च हुए Vivo T5 Lite 5G की शुरुआती कीमत 19,999 रुपये है। दोनों फोन का हार्डवेयर और स्पेसिफिकेशन एक जैसा नहीं है, इसलिए इसे सीधे एक ही फोन की कीमत दोगुनी होना नहीं कहा जा सकता। लेकिन यह उदाहरण बाजार में बदलती कीमतों की दिशा जरूर दिखाता है।कुछ साल पहले जिस प्राइस सेगमेंट में कंपनियां 5G फोन को ज्यादा आक्रामक तरीके से पेश कर रही थीं, अब उसी सेगमेंट में लागत का दबाव साफ दिखाई दे रहा है।और यह बदलाव सिर्फ एक ब्रांड तक सीमित नहीं है। Samsung, Realme, Poco, Xiaomi, Nothing समेत कई कंपनियों के स्मार्टफोन की कीमतों और कॉन्फिगरेशन में भी बदलाव देखने को मिला है।
कंपनियां सिर्फ कीमत नहीं, कॉन्फिगरेशन भी बदल रही हैं
मेमोरी की बढ़ती लागत का असर केवल स्मार्टफोन की कीमत पर नहीं पड़ रहा है। कंपनियां फोन के कॉन्फिगरेशन पर भी दोबारा विचार कर रही हैं।कुछ मॉडल में कम स्टोरेज वाले वेरिएंट पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। कुछ फोन में कैमरा सेटअप में बदलाव देखने को मिल सकता है, जबकि बजट सेगमेंट में 4G फोन को भी दोबारा जगह मिल रही है यह बदलाव इसलिए दिलचस्प है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कंपनियों के बीच 5G को ज्यादा से ज्यादा सस्ते फोन तक पहुंचाने की होड़ लगी थी। अब बढ़ती लागत के कारण कंपनियों को कीमत, फीचर्स और अपने मार्जिन के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
भारत में फोन की औसत कीमत भी बढ़ रही है
IDC के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट 4.1 फीसदी घटकर करीब 3.1 करोड़ यूनिट रही। इसके बावजूद स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत बढ़कर 302 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले के मुकाबले 10.4 फीसदी ज्यादा थी।यानी बाजार में फोन कम बिके, लेकिन औसतन महंगे फोन की बिक्री हुई। दूसरी ओर, काउंटरपॉइंट के मुताबिक 2025 में भारत में 30 हजार रुपये से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की शिपमेंट 11 फीसदी बढ़ी और इस सेगमेंट की हिस्सेदारी कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में 22 फीसदी तक पहुंच गई। इससे पता चलता है कि बाजार के एक हिस्से में ग्राहक महंगे फोन खरीद रहे हैं, जबकि 10 से 15 हजार रुपये वाले सेगमेंट में कीमतों का दबाव ज्यादा महसूस हो रहा है।
क्या 10 हजार में अच्छा 5G फोन खत्म हो जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में से एक है और यहां बजट स्मार्टफोन खरीदने वालों की संख्या काफी बड़ी है। ऐसे में कंपनियों के लिए इस सेगमेंट को पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं होगा। हालांकि, आने वाले समय में करीब 10 हजार रुपये के फोन में कुछ समझौते देखने को मिल सकते हैं। संभव है कि फोन में 5G तो मिले, लेकिन डिस्प्ले उतनी बेहतर न हो। कैमरा सीमित हो सकता है, RAM या स्टोरेज कम हो सकती है या फिर प्रोसेसर पहले के मुकाबले कमजोर हो सकता है।यानी 10 हजार रुपये में 5G फोन मिलना पूरी तरह बंद नहीं होगा, लेकिन इस कीमत में मिलने वाला पूरा पैकेज पहले जैसा मिलना मुश्किल हो सकता है।
आगे और महंगे होंगे स्मार्टफोन?
फिलहाल स्मार्टफोन बाजार पर लागत का दबाव बना हुआ है। काउंटरपॉइंट ने 2026 में भारत के स्मार्टफोन बाजार की मात्रा में करीब 13 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्टफोन की कीमत लगातार बढ़ती जाएगी। फेस्टिव सेल, बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और पुराने मॉडल पर कीमत में कटौती जैसे विकल्प ग्राहकों को कुछ राहत दे सकते हैं। लेकिन बड़ा बदलाव यह है कि बजट स्मार्टफोन का पुराना गणित अब पहले जैसा नहीं रहा।
AI के लिए बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा सेंटर की मांग ने मेमोरी की जरूरत बढ़ाई है। मेमोरी महंगी होने से फोन की लागत पर असर पड़ा है आप अगला स्मार्टफोन करीब 10 हजार रुपये के बजट में खरीदने की सोच रहे हैं, तो आने और इसका दबाव सबसे ज्यादा बजट सेगमेंट में दिखाई दे रहा है।
ऐसे में अगर आप अगला स्मार्टफोन करीब 10 हजार रुपये के बजट में खरीदने की सोच रहे हैं, तो आने वाले समय में आपको कीमत के साथ-साथ 5G, RAM, स्टोरेज, कैमरा और प्रोसेसर में से किस फीचर पर समझौता करना है, यह भी तय करना पड़ सकता है।