UCC IN CHHATTISGARH रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। राज्य कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिलने के बाद अब सरकार ने इसके मसौदे (ड्राफ्ट) को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र में UCC विधेयक पेश कर उसे पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
समिति की पहली बैठक, ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू
UCC IN CHHATTISGARH शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। इसी बैठक के साथ राज्य में UCC का प्रारूप तैयार करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। यदि विधेयक विधानसभा से पारित होकर कानून बनता है, तो छत्तीसगढ़ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम और गुजरात के बाद UCC की दिशा में आगे बढ़ने वाला प्रमुख राज्य होगा।
सभी वर्गों से लिए जाएंगे सुझाव
UCC IN CHHATTISGARH सरकार द्वारा गठित समिति राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी परिस्थितियों का अध्ययन करेगी। इसके अलावा विभिन्न समुदायों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर UCC का अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
अब तक क्या-क्या हुआ?
15 अप्रैल 2026: राज्य कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
26 जून 2026: सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति के गठन को मंजूरी दी।
24 जुलाई 2026: समिति की पहली बैठक हुई और मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
UCC ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति में कौन-कौन हैं?
सरकार ने UCC का प्रारूप तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें शामिल हैं—
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई – अध्यक्ष
शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त IAS) – सदस्य
एम.के. राउत – सदस्य
मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) – सदस्य
ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्य) – सदस्य
UCC IN CHHATTISGARH क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे नागरिक कानूनों में एकरूपता आएगी, न्याय व्यवस्था अधिक सरल होगी और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
किन राज्यों में UCC की स्थिति क्या है?
उत्तराखंड-उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है, जहां UCC लागू किया गया। यह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों पर लागू है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
मध्य प्रदेश-राज्य सरकार UCC को लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है और इसे लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
असम-असम सरकार भी UCC को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में है। यहां जनजातीय समुदायों और उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को विशेष छूट देने की व्यवस्था रखी गई है।
गुजरात-गुजरात सरकार ने UCC पर अध्ययन और मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। फिलहाल राज्य में यह कानून लागू नहीं हुआ है.