घोटाले में रामगोपाल ने पाये 52 करोड़- कोल लेवी का हिसाब तलाश रही EOW
CHHATTISGARH COAL LEVY SCAM: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) लगातार पूछताछ कर रहा है। रिमांड के तीसरे दिन भी जांच एजेंसी ने कथित तौर पर 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपये के संग्रहण, प्रबंधन और उपयोग को लेकर उनसे कई सवाल पूछे। हालांकि, सूत्रों के अनुसार रामगोपाल अग्रवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया।
52 करोड़ की रकम कहां खर्च हुई?
EOW का दावा है कि कथित कोल लेवी से जुड़ी यह बड़ी रकम कांग्रेस भवन तक पहुंचाई गई थी। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस राशि का इस्तेमाल किस उद्देश्य से और कहां किया गया। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई।
आयकर छापे में मिले थे अहम दस्तावेज
जांच एजेंसी के मुताबिक, 30 जून 2022 को आयकर विभाग ने मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान बरामद डायरी और अन्य दस्तावेजों में कथित अवैध लेवी के लेन-देन का उल्लेख मिला था। EOW का दावा है कि इन दस्तावेजों में रामगोपाल अग्रवाल और उनके पुत्र वैभव अग्रवाल के नाम भी दर्ज हैं।
अन्य मामलों में भी बढ़ सकती है कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, आबकारी घोटाला, डीएमएफ और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों में भी रामगोपाल अग्रवाल का नाम सामने आया है। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी कोल लेवी मामले में हुई है, लेकिन 17 जुलाई को रिमांड समाप्त होने के बाद अन्य मामलों में भी कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इधर, EOW ने 244 करोड़ रुपये की कथित अवैध कोल लेवी मामले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के फरार सहयोगियों की तलाश भी तेज कर दी है। जांच में आरोप है कि अवैध लेवी की रकम से कई संपत्तियां खरीदी गईं। इनमें करीब 96 करोड़ रुपये में खरीदी गई एक कोल वाशरी भी शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार, आयकर छापों के बाद इस कंपनी का स्वामित्व रातों-रात दूसरे नामों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। मामले की जांच जारी है।