BILASPUR NEWS: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में आग लगने की बढ़ती घटनाओं और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल बजट आवंटित करना और टेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी बताना होगा कि खरीद प्रक्रिया किस चरण में है और संबंधित कार्यों के लिए वर्क ऑर्डर कब जारी किए गए हैं।
राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के निदेशक द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि करीब 72.70 करोड़ रुपये की लागत से फायर टेंडर, वॉटर टेंडर, फोम टेंडर और मिनी-मिस्ट फायर वाहनों की खरीद की प्रक्रिया GeM पोर्टल के माध्यम से जारी है। फिलहाल यह तकनीकी मूल्यांकन के चरण में है।
इसके अलावा 51.58 करोड़ रुपये की लागत से 60 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने वाली हाइड्रोलिक लिफ्ट खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं राज्य में 16 नए फायर स्टेशनों के निर्माण के लिए 44.32 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर जिलों में फायर स्टेशन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और आवश्यक राशि भी जारी कर दी गई है। वहीं मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बीजापुर, सारंगढ़, सुकमा और नारायणपुर सहित 11 जिलों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया अभी लंबित है।
राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया है कि फायर सेफ्टी उपकरणों और आपदा प्रबंधन कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिसमें सरकार को उपकरणों की खरीद और नए फायर स्टेशनों के निर्माण की वर्तमान स्थिति से अदालत को अवगत कराना होगा।