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गाड़ियों की टैंक करा लें फुल, नहीं तो मुश्किल में पड़ जाएंगे आप! पेट्रोल पंप संचालकों ने किया हड़ताल का ऐलान

पेट्रोल पंप संचालकों ने 1 जून से राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने की घोषणा की है।

Petrol Diesel Crisis: जयपुर : राजस्थान में पेट्रोल पंप संचालकों ने 1 जून से राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती लागत, तेल कंपनियों की नीतियों और महंगे ईंधन के कारण पेट्रोल पंप संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो पूरे प्रदेश में पेट्रोल पंप बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

महंगे ईंधन से घट रही बिक्री

पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक हैं। इसके पीछे राज्य में लागू ऊंचे वैट को मुख्य कारण बताया जा रहा है। महंगे दामों की वजह से सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग दूसरे राज्यों में जाकर ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे राजस्थान के पेट्रोल पंपों की बिक्री लगातार प्रभावित हो रही है।

छोटे शहरों और गांवों में बढ़ी परेशानी

डीलर्स के मुताबिक बिक्री में गिरावट के कारण कई पेट्रोल पंप आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब है, जहां पहले से ही ग्राहकों की संख्या सीमित रहती है। संचालकों का कहना है कि बिजली बिल, कर्मचारियों की सैलरी, सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कमीशन में कोई राहत नहीं दी जा रही।

सप्लाई में कमी से लोगों में चिंता

एसोसिएशन ने तेल कंपनियों पर सप्लाई में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई जगहों पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके कारण कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। इस स्थिति से आम लोगों में चिंता बढ़ने लगी है और कई लोग पहले से ज्यादा ईंधन भरवाने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार को दिया गया अल्टीमेटम

पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग की है। एसोसिएशन ने सरकार को चार दिन का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 1 जून को पूरे राज्य में पेट्रोल पंप बंद रहेंगे।

आम जनता और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर संभव

यदि हड़ताल होती है तो इसका असर आम लोगों, किसानों, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और बाजारों पर पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कमी से बसों, ट्रकों और निजी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। डीलर्स का कहना है कि अगर सरकार वैट कम करती है तो ईंधन सस्ता होगा, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी फायदा पहुंच सकता है।