Chhattisgarh Constable Recruitment: रायपुर। प्रदेश में बहुचर्चित आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर रिट याचिका पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया पर लगा स्टे समाप्त करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और जॉइनिंग के बाद जो पद रिक्त रह जाएं, उन्हें प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) के अभ्यर्थियों से भरा जाए। इस आदेश के साथ ही कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
Chhattisgarh Constable Recruitment: मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तर्क रखा गया कि पुलिस विभाग द्वारा करीब 5967 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, चूंकि भर्ती विज्ञापन में एक अभ्यर्थी को एक से अधिक जिलों से आवेदन करने की अनुमति थी, इसलिए बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने कई जिलों में आवेदन किया और मेरिट के आधार पर वे एक से अधिक जिलों की चयन सूची में शामिल हो गए।
Chhattisgarh Constable Recruitment: याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि ऐसे अभ्यर्थी अंततः केवल एक ही जिले में जॉइन करेंगे, जिससे अन्य जिलों में हजारों पद खाली रह जाएंगे। उनका दावा था कि वास्तविकता में लगभग 2500 पद ही भरे जा सकेंगे, जबकि शेष पद खाली रह सकते हैं। साथ ही, कुछ मामलों में ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में भी चयनित दिखाने को लेकर भी आपत्ति जताई गई।
वहीं, राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत पक्ष में इन तथ्यों का पूरी तरह खंडन नहीं किया गया कि कुछ अभ्यर्थी एक से अधिक जिलों में चयनित हुए हैं। हालांकि, राज्य के वकील ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन के अनुरूप ही संचालित की गई है और किसी भी अभ्यर्थी को एक से अधिक जिलों में आवेदन करने से नहीं रोका गया था।
Chhattisgarh Constable Recruitment:
राज्य ने यह भी बताया कि प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग मेरिट सूची तैयार कर कुल 5948 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई है। यदि कोई अभ्यर्थी एक से अधिक जिलों में चयनित होता है, तो वह अंततः केवल एक ही स्थान पर कार्यभार ग्रहण करेगा। ऐसे में जिन अन्य जिलों में उसका नाम चयन सूची में है, वे पद स्वतः रिक्त हो जाएंगे।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति का आकलन तभी संभव है, जब चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति लेकर कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। इसके बाद जो पद खाली रहेंगे, उन्हें रिक्त घोषित कर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को उनकी श्रेणी के अनुसार अवसर दिया जाएगा।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि मौजूदा स्थिति में चयन सूची से सभी पदों का भरना संभव नहीं है। ऐसे में न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि पहले चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण कराई जाए और उनके जॉइनिंग के बाद वास्तविक रिक्त पदों का निर्धारण किया जाए।
इसके बाद राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि शेष रिक्त पदों को विधि सम्मत तरीके से प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों से भरा जाए, ताकि किसी भी पात्र उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो।




