बीजापुर.
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों में स्कूली बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Bijapur जिले के सरकारी कन्या आवासीय छात्रावासों में पढ़ने वाली छात्राओं के गर्भवती होने के मामलों ने व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि इन मामलों में हॉस्टल और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया, जबकि Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO एक्ट) के तहत प्रबंधन को तत्काल जिला बाल संरक्षण अधिकारी और स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना देना अनिवार्य था। इसके बावजूद मामले को दबाने और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई।
जिले के एक सरकारी आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली तीन छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सामने आया है। इनमें से दो छात्राएं नाबालिग बताई जा रही हैं।जानकारी के अनुसार यह मामला जिला मुख्यालय से लगभग 25 किमी दूर स्थित एक हायर सेकेंडरी आवासीय छात्रावास का है। बताया जा रहा है कि छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी मिलने के बाद लगभग पांच महीने पहले ही उन्हें विद्यालय से निकाल दिया गया था।शनिवार को जब दो छात्राएं 12वीं कक्षा का अंतिम पेपर देने स्कूल पहुंचीं, तब इस मामले का खुलासा हुआ। तीसरी छात्रा 11वीं कक्षा में पढ़ती है। तीनों छात्राओं का नाम आवासीय पोर्टा केबिन (आरएमएसए) में दर्ज बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा इन छात्राओं के गर्भावस्था कार्ड भी बनाए गए हैं। इस मामले में छात्रावास अधीक्षिका का कहना है कि यह घटना उनके कार्यकाल की नहीं है। वहीं स्थानीय सरपंच के अनुसार छात्राओं ने Gangloor स्थित आवासीय पोर्टा केबिन में रहने की बात स्वीकार की है।
परीक्षा देने आईं तब हुआ मामला उजागर सूत्रों के अनुसार छात्रावास और स्कूल प्रबंधन ने इस पूरे मामले को दबा दिया था। लेकिन जब छात्राएं परीक्षा देने स्कूल पहुंचीं, तब मामला सामने आया और मीडिया सहित अन्य लोगों को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद प्रशासन ने जांच और कार्रवाई की बात कही है।
यह पहली घटना नहीं
बीजापुर समेत छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी पिछले कुछ समय में छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं के गर्भवती होने के मामले सामने आते रहे हैं।
बीजापुर (मार्च 2026):
हाल ही में Bijapur के एक आवासीय स्कूल की तीन छात्राएं गर्भवती पाई गईं। इससे पहले मार्च 2024 में भी जिले के एक पोर्टा केबिन स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया था।
कोरबा (जनवरी 2025):
Korba जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 11वीं कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा ने छात्रावास के शौचालय में एक बच्ची को जन्म दिया था। रिपोर्ट के अनुसार छात्रा ने नवजात को खिड़की से बाहर फेंक दिया था, जिससे बच्ची की हालत गंभीर हो गई थी। इस मामले में लापरवाही बरतने पर छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल निलंबित कर दिया गया था।
सुकमा (नवंबर 2024):
Sukma जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की 12वीं कक्षा की एक छात्रा दीपावली की छुट्टियों के बाद छात्रावास लौटी तो मेडिकल जांच में वह गर्भवती पाई गई। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे।
बच्चों को यौन शोषण से बचाने वाला कानून POCSO एक्ट क्या कहता है
नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए कानून Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO एक्ट) के तहत ऐसी घटनाओं की जानकारी मिलने पर संस्था प्रमुख को तुरंत पुलिस और जिला बाल संरक्षण अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य है।
POCSO एक्ट के प्रमुख प्रावधान:
संस्था प्रमुख को घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को देना अनिवार्य है (धारा 19)।

सूचना छिपाने पर धारा 21 के तहत 6 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।
यदि अपराध शिक्षक, वार्डन या किसी कर्मचारी द्वारा किया गया हो तो इसे गंभीर दुष्कर्म (Aggravated Penetrative Sexual Assault) माना जाता है।
इस अपराध में 20 साल की जेल से लेकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
कानून के अनुसार संस्था प्रमुख की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, पीड़िता को मेडिकल सहायता दिलाए और पुलिस जांच में सहयोग करे।




