राजस्थान : Rajasthan News राजस्थान के पाली जिले में गुर्जर समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। चंडावल के पास स्थित देवडूंगरी भगवान देवनारायण मंदिर परिसर में आयोजित महापंचायत, जिसे समाज में “गुर्जर हाईकोर्ट” के नाम से जाना जाता है, में कई अहम और सख्त फैसले लिए गए। इन निर्णयों की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
महापंचायत में सबसे बड़ा फैसला सामाजिक आयोजनों में नशे की परंपरा को खत्म करने को लेकर लिया गया। समाज में लंबे समय से शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों में अफीम, डोडा और शराब जैसी नशीली वस्तुओं की मनुहार को परंपरा माना जाता था, लेकिन अब इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। तय किया गया है कि यदि किसी समारोह में नशे की मनुहार की गई, तो समाज के लोग उस कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे और वहां भोजन भी नहीं करेंगे।
इतना ही नहीं, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। समाज की ओर से कहा गया है कि ऐसे मामलों की सूचना पुलिस को दी जाएगी और दोषी परिवार पर 2.51 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह कदम नई पीढ़ी को नशे से बचाने और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
महापंचायत में शादी समारोहों को लेकर भी नया नियम बनाया गया। फैसले के अनुसार अब दूल्हे को विवाह के समय क्लीन शेव रहना अनिवार्य होगा। दाढ़ी रखकर शादी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। समाज इसे अपनी पारंपरिक व्यवस्था और अनुशासन से जोड़कर देख रहा है।
इस महापंचायत में पाली, जोधपुर, ब्यावर, जालोर और नागौर सहित पांच जिलों के समाजबंधु शामिल हुए। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि ये सभी नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
बैठक में मृत्युभोज और फिजूलखर्ची जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। समाज के लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों में खर्च होने वाले लाखों रुपए यदि गरीब परिवारों की सहायता, बच्चों की शिक्षा और बेटियों की शादी जैसे कार्यों में लगाए जाएं, तो समाज को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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भगवान देवनारायण मंदिर ट्रस्ट देवडूंगरी और 11 हथाई गुर्जर समाज मारवाड़ के उपाध्यक्ष नारायण फौजी ने बताया कि समाज में बढ़ती कुरीतियों और अनावश्यक खर्चों को रोकने के लिए ये फैसले बेहद जरूरी थे। उनका कहना है कि शिक्षा, जागरूकता और अनुशासन के जरिए समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें।




