RAIPUR NEWS: रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रायपुर नगर निगम में सहायक लेखा अधिकारी (AAO) पद पर की गई विभागीय पदोन्नतियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने रिट अपील क्रमांक 630/2026 पर फैसला देते हुए पदोन्नति प्रक्रिया को वैध माना और पहले दिए गए सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त कर दिया।
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि AAO पद पर पदोन्नति के लिए केवल सेवा अवधि पर्याप्त नहीं है। संबंधित नियमों के अनुसार अभ्यर्थी के पास अकाउंट्स ट्रेनिंग उत्तीर्ण करने के बाद का न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। इसी आधार पर भारतेश नेताम द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया गया।
फैसले की मुख्य बातें
* डिवीजन बेंच ने 16 अप्रैल 2026 को पारित सिंगल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया।
* भारतेश नेताम की पदोन्नति संबंधी चुनौती को न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया।
* कोर्ट ने कहा कि पांच वर्ष का अनुभव अकाउंट्स ट्रेनिंग पूर्ण होने के बाद का ही माना जाएगा।
* 17 जनवरी 2025 को जारी पदोन्नति आदेश को वैध करार दिया गया।
क्या था पूरा विवाद?
नगर निगम रायपुर में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम, 2018 (संशोधित 2021) के तहत विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की अनुशंसा पर सहायक लेखा अधिकारी के पदों पर पदोन्नतियां की गई थीं। इन पदोन्नतियों को चुनौती देते हुए भारतेश नेताम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। प्रारंभिक सुनवाई में सिंगल बेंच ने पदोन्नति आदेश निरस्त कर पुनः समीक्षा डीपीसी कराने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, इस आदेश के विरुद्ध दायर रिट अपील पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने नियमों की अलग व्याख्या की और कहा कि पात्रता का निर्धारण अकाउंट्स ट्रेनिंग पूरी होने की तिथि से किया जाएगा।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने 8 सितंबर 2022 को अकाउंट्स ट्रेनिंग पूरी की थी। जबकि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक 14 जनवरी 2025 को हुई थी। इस अवधि में प्रशिक्षण के बाद आवश्यक पांच वर्ष का अनुभव पूरा नहीं हुआ था। ऐसे में याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए पात्र नहीं थे। इसी आधार पर न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए 17 जनवरी 2025 के पदोन्नति आदेश को बरकरार रखा।