JANJGIR CHAMPA NEWS. जांजगीर-चांपा जिले के कोसमंदा गांव के ठाकुरदिया चौक में बना गणेश पंडाल इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हर साल छत्तीसगढ़ी थीम के लिए अपनी अलग पहचान बनाने वाली ठाकुरदिया चौक गणेश उत्सव समिति ने इस बार भक्ति के साथ पर्यावरण और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अनोखा मेल दिखाया है।
इस पंडाल की सबसे खास बात इसकी सादगी और देसी अंदाज है। शहरों की तर्ज पर चमकदार सजावट और आधुनिक सामग्री के बजाय यहां मिट्टी, खपरैल और प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया गया है। पंडाल की दीवारों पर मिट्टी की लिपाई की गई है, जबकि उन पर छत्तीसगढ़ी चौक-लीपना, बैलगाड़ी, गाड़ा और ग्रामीण जीवन से जुड़े पारंपरिक चित्र बनाए गए हैं।
खपरैल की छत ने बढ़ाई गांव की खूबसूरती
पंडाल को पूरी तरह ग्रामीण परिवेश का रूप देने के लिए छत पर प्लास्टिक या टीन की जगह पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले खपरैल लगाए गए हैं। इससे पंडाल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गांव जैसा स्वरूप मिला है।पंडाल के भीतर भी भगवान गणेश का स्वरूप लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां गणेश जी को किसी भव्य सिंहासन पर नहीं, बल्कि विशाल शंख में विराजमान किया गया है।
गोबर से तैयार की गई गणेश प्रतिमा
इस बार समिति ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए गणेश जी की प्रतिमा गोबर से तैयार की है। समिति के सदस्यों के मुताबिक, प्रतिमा निर्माण में प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, ताकि विसर्जन के बाद जलस्रोतों पर प्रदूषण का असर कम हो।
पिछले साल भी थी छत्तीसगढ़ी थीम
ठाकुरदिया चौक गणेश उत्सव समिति पिछले साल भी अपनी अनोखी थीम को लेकर चर्चा में रही थी। वर्ष 2025 में समिति ने ‘छत्तीसगढ़ी आनंद’ थीम पर पंडाल तैयार किया था, जिसमें प्रदेश के लोक वाद्य यंत्रों और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया था। इस बार समिति ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंडाल को और अधिक प्राकृतिक रूप दिया है। भक्ति, लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के इस मेल को देखने के लिए रोज शाम बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु दर्शन के साथ पंडाल की सजावट और सेल्फी लेने में भी खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं।