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‘शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं’, हाईकोर्ट का फैसला, 20 साल बाद युवक आरोप से बरी

High Court Decision बिलासपुर: छतीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं है। इस मामले में पीडि़ता की उम्र घटना के समय लगभग 26 वर्ष थी और उसे संबंधों के परिणामों की जानकारी थी। हाई कोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को अवैध बताते हुए युवक को 20 साल के बाद दुष्कर्म के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।

दुष्कर्म का मामला दर्ज

High Court Decision हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दोषमुक्त करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा अगर लड़की बालिग है और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बने हैं, तो उसे रेप नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने लोअर कोर्ट की ओर से आरोपी युवक को दोषी ठहराने के आदेश को अवैध मानते हुए उसे निरस्त कर दिया और आरोपी को बरी कर दिया।

क्या है मामला

High Court Decision मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र का है। सरगुजा जिले की युवती साल 2000 में 12वीं कक्षा की छात्रा थी। वह किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसकी दोस्ती एक छात्र से हुई। कुछ दिनों के बाद दोनों का अफेयर हो गया और दोनों साथ ही में एक ही मकान में रहने लगे। इस दौरान शारीरिक संबंध बने। करीब तीन साल तक दोनों साथ में रहे और दोनों के बीच फिजिकल रिलेशन थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों अपने गांव चले गए। इसके बाद धीरे-धीरे युवक ने युवती से संपर्क खत्म कर दिया। जिसके बाद युवती ने युवक के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। युवती ने अपनी शिकायत में कहा कि शादी का झांसा देकर युवक ने तीन साल तक उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाए। पीड़िता की रेप की शिकायत पर पुलिस ने युवक को गिरफ्तार किया।

लोअर कोर्ट ने सुनाई सजा

पुलिस ने जांच के बाद ट्रॉयल कोर्ट में चालान पेश किया। अंबिकापुर के जिला-सत्र न्यायालय ने युवक को आरोपी मना। कोर्ट ने युवक को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए सात साल की सजा और 5000 रुपये का अर्थदंड लगाया। लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ युवक ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई।

High Court Decision 20 साल बाद हाई कोर्ट से मिला न्याय

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि केवल शादी का बहाना बनाकर शारीरिक संबंध बनाना हर मामले में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 26 वर्ष थी और उसे कथित शारीरिक संबंधों के परिणामों की पूरी जानकारी थी। ऐसे में यह संबंध पीड़िता की सहमति से बनाए गए माने जाएंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार, शादी का झांसा देकर बनाए गए संबंध हर परिस्थिति में दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आते।