ELECTRICITY BILL HIKE: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों—BRPL, BYPL और TPDDL—को अप्रैल 2026 के लिए पावर पर्चेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) वसूलने की अनुमति दे दी है। इसके बाद बिजली बिलों में 1 फीसदी से लेकर 3.30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
ELECTRICITY BILL HIKE: यह दिल्ली में पहली बार है जब PPAC की समीक्षा और वसूली मासिक आधार पर की जाएगी। इससे पहले यह प्रक्रिया हर तीन महीने में होती थी। बढ़ी हुई दरों का असर जून महीने के बिजली बिलों में दिखाई देगा।
क्या है PPAC?
पावर पर्चेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) वह अतिरिक्त शुल्क है, जिसके जरिए बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदने की बढ़ी हुई लागत का भार उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। कोयला और अन्य ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण बिजली खरीद महंगी हो गई है। देश के 25 से अधिक राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और इसे कानूनी प्रावधानों एवं न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक माना जाता है।
किस कंपनी के उपभोक्ताओं पर कितना शुल्क?
DERC ने बिजली कंपनियों की मांग के मुकाबले कम PPAC लागू करने की अनुमति दी है।
- BRPL (दक्षिण दिल्ली) – 17.94%
- BYPL (पूर्वी दिल्ली) – 17.43%
- TPDDL (उत्तर और पश्चिम दिल्ली) – 16%
हालांकि वास्तविक बिल पर इसका प्रभाव कंपनी के टैरिफ और खपत के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
किन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर?
दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले 200 से 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि सब्सिडी यूनिट आधारित है, न कि बिल की कुल राशि पर।
वहीं, 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले या सब्सिडी के दायरे से बाहर उपभोक्ताओं को अप्रैल माह के बिल पर 7 से 18 फीसदी तक अतिरिक्त सरचार्ज देना पड़ सकता है।
क्या है नया ‘रूल F’?
नए नियम ‘F’ के तहत यदि किसी महीने में PPAC की पूरी राशि वसूल नहीं हो पाती है, तो शेष राशि को आने वाले महीनों में धीरे-धीरे उपभोक्ताओं से वसूला जा सकेगा। इससे बिजली कंपनियों को अपने राजस्व की भरपाई करने में सुविधा होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को बिजली उत्पादक कंपनियों को समय पर भुगतान करना होता है। यदि PPAC नहीं लिया जाए तो कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, जिससे ब्याज का अतिरिक्त बोझ पैदा होगा। अंततः इसका असर भी उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है। DERC का मानना है कि समय पर PPAC वसूली से यह अतिरिक्त बोझ कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
पावर सेक्टर विशेषज्ञ बी.एस. वोहरा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि DERC ने पहले ही डिस्कॉम्स को बिलिंग चक्र के दौरान अधिकतम 10 फीसदी तक FPPAC लगाने की अनुमति दी थी, लेकिन कंपनियां इससे अधिक वसूली की मांग कर रही हैं।
ELECTRICITY BILL HIKE
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी CAG ऑडिट के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। उनके अनुसार करीब 38,500 करोड़ रुपये की नियामकीय परिसंपत्तियों (Regulatory Assets) का भार भी भविष्य में उपभोक्ताओं से वसूला जाना है, जो दिल्लीवासियों के लिए एक गंभीर आर्थिक चिंता का विषय है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली सरकार से हस्तक्षेप कर विस्तृत समीक्षा कराने की मांग की है।