Chhattisgarh High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट में एक पिता ने अपने बेटे की कुत्ते के काटने से हुई मौत के मामले में राज्य शासन से चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर प्रशासन द्वारा प्रभावी नियंत्रण नहीं किए जाने के कारण उसके बेटे की जान गई।
Chhattisgarh High Court: इस मामले की सुनवाई जस्टिस एन.के. व्यास की वेकेशन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता धीरज पारधी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आवारा कुत्तों के आतंक के बावजूद प्रशासन ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिससे आम लोगों की सुरक्षा खतरे में है। इसी आधार पर राज्य सरकार को मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आर.के. गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में ऐसा कोई स्पष्ट नियम या प्रावधान नहीं है, जिसके तहत कुत्ते के काटने से मौत होने पर पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जा सके।
Chhattisgarh High Court: सरकार की दलील के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय निकायों द्वारा अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
Chhattisgarh High Court:
हाईकोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत या गंभीर चोट आवारा कुत्तों के हमले से होती है, तो पीड़ित परिवार को राहत देने के लिए कोई नीति या मुआवजा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई है। इस मामले ने जनसुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला भविष्य में आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े मामलों में मुआवजा नीति तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।




