बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिल्ली की एक कंपनी को बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना अनिवार्य है। डिवीजन बेंच ने कंपनी को 30 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके बाद संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकेगा।
33 टावर लगाने का मिला था ठेका, 20 का भुगतान अटका
मामले के अनुसार, कंपनी के प्रोपराइटर शिव कुमार शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उनकी कंपनी को पुलिस विभाग के लिए 33 संचार टावर लगाने का ठेका मिला था। कंपनी का दावा है कि उसने निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा कर लिया, लेकिन विभाग ने केवल 13 टावरों का भुगतान किया। बाकी 20 टावरों का भुगतान यह कहते हुए रोक दिया गया कि उनका निर्माण निविदा की शर्तों के अनुरूप नहीं हुआ है।
बकाया भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कार्यवाही भी लंबित है।
पहले दी गई थी कमियां दूर करने की चेतावनी
कंपनी के मुताबिक, 26 फरवरी 2026 को जारी पत्र में उसे 15 मार्च तक कथित कमियां दूर करने के लिए कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में सुधार नहीं होने पर सुरक्षा राशि जब्त करने के साथ कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके बाद 16 जून 2026 को कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे न तो विधिवत कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिला। कंपनी ने इसी आधार पर विभाग के आदेश को चुनौती दी थी।
सरकार ने क्या दी दलील?
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कंपनी को 20 टावरों में पाई गई कमियां दूर करने का अवसर दिया गया था। उसे यह चेतावनी भी दी गई थी कि तय समय में सुधार नहीं करने पर सुरक्षा राशि जब्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने यह भी बताया कि कंपनी ने 12 अगस्त 2025 को लिखे पत्र में टावरों का निर्माण निर्धारित तकनीकी शर्तों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार की थी और कमियां दूर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया ब्लैकलिस्टिंग का आदेश?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना जरूरी है। केवल कमियां दूर करने की चेतावनी देना, ब्लैकलिस्ट करने से पहले सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता को समाप्त नहीं करता।
इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कंपनी को 30 दिन के भीतर अपना जवाब देने का निर्देश दिया है। जवाब मिलने के बाद विभाग नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।