रायपुर से निकला प्रतिबंधित एनालॉग अंबिकापुर में जब्त। राजधानी के अधिकारियों को नहीं दिखा या संरक्षण है ? खाद्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल !
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एनालॉग (नकली पनीर) पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होने के बाद पहली बड़ी कार्रवाई अंबिकापुर में हुई है। रविवार को रायपुर से राजहंस बस सर्विस के माध्यम से भेजी जा रही लगभग 200 किलो प्रतिबंधित एनालॉग पनीर की खेप को अंबिकापुर के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जब्त कर लिया। इस कार्रवाई ने राजधानी रायपुर के खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो प्रतिबंधित माल रायपुर के आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) से बस में लोड होकर सैकड़ों किलोमीटर दूर अंबिकापुर पहुंच गया, वह राजधानी के अधिकारियों को क्यों नहीं दिखा? क्या रायपुर में जांच नहीं हो रही थी, या फिर जांच जानबूझकर नहीं की जा रही थी?
सरकार ने पूरी तरह लगाया है प्रतिबंध
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि तेल, चर्बी, फैट और दूध पाउडर से तैयार होने वाले एनालॉग को छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा आदेश जारी कर इसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
आदेश के अनुसार एनालॉग का निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, बिक्री और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद प्रतिबंध लागू होने के बाद रायपुर से इतनी बड़ी खेप का बस के माध्यम से भेजा जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
अंबिकापुर के अधिकारियों ने पकड़ लिया, रायपुर वालों को क्यों नहीं दिखा?
जिस प्रतिबंधित माल को अंबिकापुर के खाद्य अधिकारियों ने जांच के दौरान पकड़ लिया, वही माल रायपुर से खुलेआम बस में लोड होकर निकल गया। यदि अंबिकापुर की टीम उसे पकड़ सकती है, तो राजधानी में बैठे अधिकारियों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?
क्या राजधानी में प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित है?
आधिकारिक नोटिस में रायपुर से अवैध परिवहन का उल्लेख
अंबिकापुर खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि 30 जुलाई 2026 से एनालॉग पनीर के परिवहन पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद रायपुर से अंबिकापुर तक प्रतिबंधित एनालॉग पनीर का परिवहन किया गया, जो शासन के आदेश का उल्लंघन है। यानी अब मामला केवल चर्चा का नहीं, बल्कि विभागीय कार्रवाई और आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है।
बस संचालक से मांगी पूरी सप्लाई चेन की जानकारी
खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में बस संचालक को तीन कार्य दिवस के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि—
* 1 अगस्त को रायपुर में वाहन में प्रतिबंधित माल लोड कराने वाले व्यक्ति का नाम और पता उपलब्ध कराया जाए।
* 2 अगस्त को अंबिकापुर में माल उतरवाने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति का नाम और पता भी बताया जाए।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 58 के तहत न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
क्या कुछ अधिकारियों पर कार्टेल का दबाव भारी पड़ रहा है?
प्रतिबंध लागू होने के बाद राजधानी रायपुर में अब तक किसी बड़े अभियान, गोदामों पर छापेमारी या बस टर्मिनलों की व्यापक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।
जबकि लंबे समय से यह आरोप और शिकायतें सामने आती रही हैं कि रायपुर का आईएसबीटी डेयरी उत्पादों की बड़ी खेप को प्रदेश के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों तक भेजने का प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट रहा है।
पहले भी मीडिया की सूचना पर बस के माध्यम से भेजी जा रही संदिग्ध पनीर की खेप जब्त की गई थी। इसके बावजूद आज तक बसों और बस टर्मिनल की नियमित जांच व्यवस्था विकसित नहीं की गई।
क्या मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के आदेश का भी असर नहीं?
मुख्यमंत्री की घोषणा, स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश और स्वास्थ्य सचिव द्वारा जारी आदेश के बाद उम्मीद थी कि पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर प्रतिबंधित एनालॉग के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।लेकिन अंबिकापुर की कार्रवाई यह सवाल खड़ा करती है कि यदि प्रतिबंधित माल रायपुर से ही निकल रहा था, तो राजधानी में जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
रायपुर से
– प्रकाश देवांगन
– गोपी चावला
– दुष्यंत लाखोटिया
– कुरैशी (पुरानी बस्ती)
– अंशु बंसल
– अंकुर बंसल (एनएसयूआई नेता)
– सौरभ शर्मा
– दीवान यादव
– अशोक शर्मा
– गोलू शर्मा
– हुकुमचंद बंसल
– भाठागांव के पाराशर बंधुओं समेत कई ऐसे मुनाफाखोर हैं, जिनके पनीर के सैंपल लगातार फेल हुए हैं और मिलावटी पाए गए हैं।
इनमें से कुछ लोग न सिर्फ रायपुर, बल्कि पूरे प्रदेश में तथा बसों के माध्यम से ओडिशा तक कथित नकली पनीर की सप्लाई करते हैं।
सूत्रों के अनुसार सौरभ शर्मा,गोलू और गोपी चावलगोपी चावला भोपाल, जबलपुर और पुणे से चर्बी युक्त पनीर ट्रेन के माध्यम से मंगाकर प्रदेश में ट्रेडिंग के जरिए सप्लाई करते हैं। पिछली बार मीडिया की सूचना पर कांकेर बस कार्यालय तक बस के माध्यम से पहुंची पनीर की बड़ी खेप जब्त की गई थी। स्टेशन से भी पनीर पकड़ा गया था । उसके बाद से आज तक बसों या बस टर्मिनल , स्टेशन में नियमित जांच नहीं की गई।
अब केवल बस नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी
यह मामला केवल एक बस या एक खेप तक सीमित नहीं है। अब जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि—
* प्रतिबंधित एनालॉग कहाँ तैयार हुआ?
* किस स्थान से बस में लोड किया गया?
* सप्लाई का पूरा नेटवर्क क्या है?
* परिवहन के दौरान निगरानी क्यों नहीं हुई?
* प्रतिबंध लागू होने के बाद भी राजधानी से यह माल बाहर कैसे निकल गया?
जनता का सवाल—राजधानी में कार्रवाई कब होगी?
अंबिकापुर के अधिकारियों ने कार्रवाई कर यह साबित कर दिया कि प्रतिबंधित माल पकड़ा जा सकता है। अब निगाहें रायपुर के खाद्य एवं औषध प्रशासन पर हैं।
जनता जानना चाहती है कि क्या राजधानी में भी बड़े पैमाने पर छापेमारी होगी? क्या प्रतिबंधित एनालॉग के निर्माण, भंडारण और परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई होगी? या फिर कार्रवाई केवल दूसरे जिलों तक ही सीमित रहेगी?