BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारी की मौत से जुड़े बीमा मुआवजे के एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि सिर्फ इस वजह से कि कर्मचारी की मौत रात की शिफ्ट में हुई थी, बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि बीमा पॉलिसी में कर्मचारी के जोखिम को किसी खास समय या शिफ्ट तक सीमित करने की स्पष्ट शर्त मौजूद नहीं है, तो बीमा कंपनी को पॉलिसी के तहत मुआवजे का भुगतान करना होगा।
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील की खारिज
जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही बालोदाबाजार श्रम न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा गया, जिसमें मृत कर्मचारी के आश्रित को 4 लाख 48 हजार 554 रुपये मुआवजा और 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया गया था।
दाल मिल में काम के दौरान हुई थी कर्मचारी की मौत
मामला 26-27 नवंबर 2015 की रात का है। दाल मिल में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी की मौत काम के दौरान दाल के टैंक के नीचे आने से हो गई थी। महिला की मौत के बाद उसके आश्रित उदयराम यादव ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत मुआवजे के लिए दावा किया था। मामले में श्रम न्यायालय ने मुआवजे का आदेश दिया था, जिसे बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
बीमा कंपनी ने क्या दलील दी?
बीमा कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि पॉलिसी में कर्मचारियों से दो शिफ्ट में काम लेने का जोखिम कवर नहीं था। कंपनी का कहना था कि जिस समय कर्मचारी की मौत हुई, वह पॉलिसी के तहत कवर किए गए जोखिम में शामिल नहीं था। हालांकि, हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा- पॉलिसी में समय की कोई सीमा नहीं
हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित बीमा पॉलिसी में दाल मिल के कर्मचारियों के जोखिम को कवर किया गया था। कोर्ट के सामने यह भी आया कि बीमा कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी ने कर्मचारियों के जोखिम के कवर होने की बात स्वीकार की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पॉलिसी में कर्मचारी के जोखिम को किसी विशेष समय या शिफ्ट तक सीमित करने की शर्त नहीं है, तो सिर्फ इस आधार पर कि कर्मचारी की मौत रात करीब 1:30 बजे हुई, बीमा कंपनी को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।
4.48 लाख मुआवजा और 10% ब्याज का आदेश बरकरार
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए 21 जनवरी 2020 को श्रम न्यायालय द्वारा जारी आदेश को बरकरार रखा।इस फैसले के तहत मृत कर्मचारी के आश्रित को 4,48,554 रुपये मुआवजा और 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाना है।