BILASPUR NEWS. सड़क हादसे में मुआवजे को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि हादसे के समय वाहन का बीमा वैध था, लेकिन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, तो बीमा कंपनी को पीड़ित को मुआवजा देने से पूरी तरह मुक्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, बीमा कंपनी को बाद में यह रकम वाहन मालिक या चालक से वसूलने का अधिकार रहेगा। हाईकोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के ‘पे एंड रिकवर’ सिद्धांत के तहत लागू किया है।जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की एकलपीठ ने दो अलग-अलग मोटर दुर्घटना मामलों में पीड़ित परिवारों के पक्ष में 28 लाख रुपये से अधिक के मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।
मंदिर जाते समय 19 वर्षीय युवक को बाइक ने मारी टक्कर
पहला मामला दंतेवाड़ा का है। 10 अक्टूबर 2018 की रात 19 वर्षीय हलधर बघेल अपने दोस्तों के साथ पैदल दंतेश्वरी मंदिर जा रहा था। इसी दौरान बाइक क्रमांक CG 04 KP 2757 ने उसे टक्कर मार दी। हादसे के बाद हलधर को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके माता-पिता संपत बघेल और दयामती ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे के लिए दावा पेश किया। जगदलपुर के प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 15 जुलाई 2022 को पीड़ित परिवार को 12.55 लाख रुपये मुआवजा और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था।
ड्राइविंग लाइसेंस की जांच में सामने आया बड़ा तथ्य
मामले की जांच में पता चला कि बाइक चालक सुखचंद कश्यप ने जो ड्राइविंग लाइसेंस पेश किया था, वह दंतेवाड़ा परिवहन कार्यालय से जारी ही नहीं हुआ था। इस आधार पर हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को अंतिम दायित्व से मुक्त माना, लेकिन पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलने में बाधा नहीं आने दी। कोर्ट ने ‘पे एंड रिकवर’ के सिद्धांत के तहत बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देने और बाद में संबंधित वाहन मालिक-चालक से रकम वसूलने की छूट दी।
दूसरे मामले में भी बीमा कंपनी की अपील खारिज
दूसरा मामला जांजगीर-चांपा जिले का है। बम्हनीडीह निवासी अशोक पांडेय की 27 फरवरी 2023 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनकी पत्नी रामकुमारी पांडेय और दो नाबालिग बेटों धीरज व अमन ने मुआवजे के लिए दावा किया था। जांजगीर-चांपा के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 6 दिसंबर 2024 को परिवार को 15 लाख 46 हजार 780 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील की। बीमा कंपनी का तर्क था कि वाहन चालक तुषार राठौर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन के कारण कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्यों लागू किया ‘पे एंड रिकवर’ नियम?
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने अधिकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी को पहले 15.46 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कंपनी को यह रकम बाद में वाहन मालिक और चालक से वसूलने का अधिकार दिया गया।
BILASPUR NEWS क्या है ‘पे एंड रिकवर’?
सरल भाषा में समझें तो ‘पे एंड रिकवर’ का मतलब है कि हादसे के पीड़ित को मुआवजा मिलने में देरी न हो। बीमा कंपनी पहले अदालत द्वारा तय राशि का भुगतान करती है। इसके बाद यदि पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन साबित होता है, तो बीमा कंपनी संबंधित वाहन मालिक या चालक से वह रकम वसूल सकती है। दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने इसी सिद्धांत को लागू करते हुए पीड़ित परिवारों के मुआवजे का रास्ता बरकरार रखा है।