मिठाइयों पर चांदी नहीं, एल्युमिनियम का वर्क! संदीप शुक्ला के स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा
Raipur Silver Foil Investigation: रायपुर में मिठाइयों की चमक के पीछे बड़ा खेल। पाँच ब्रांड के नमूनों की जाँच में दो में चाँदी की जगह एल्युमिनियम मिलने का खुलासा। Raw Reporter के पत्रकार संदीप शुक्ला ने किया स्टिंग ऑपरेशन और जाँच।
रायपुर। दीपावली और त्योहारों पर मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही उन्हें आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले चाँदी के वर्क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मिठाइयों पर चाँदी की तरह चमकने वाली जिस परत को लोग असली चाँदी समझकर खाते हैं, वह एल्युमिनियम भी हो सकती है। रायपुर में किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन और नमूनों की जाँच से यह चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
इस पूरे मामले की पड़ताल Raw Reporter के पत्रकार संदीप शुक्ला ने की। संदीप शुक्ला ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बाजार में बिकने वाले चाँदी के वर्क की वास्तविकता सामने लाने की पहल की। जाँच में पाँच ब्रांड के नमूनों को शामिल किया गया। प्रकाशित जाँच रिपोर्ट के अनुसार, इन पाँच नमूनों में से दो में चाँदी की जगह एल्युमिनियम पाया गया।
नाइट्रिक एसिड की जाँच में सामने आया अंतर
चाँदी के वर्क की वास्तविकता जानने के लिए नमूनों की जाँच की गई। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, नाइट्रिक एसिड में नमूनों के घुलने और न घुलने के व्यवहार के आधार पर अंतर सामने आया। जाँच में दो नमूनों में एल्युमिनियम होने का खुलासा हुआ।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि मिठाइयों पर लगाया जाने वाला वर्क सीधे लोगों के भोजन का हिस्सा बनता है। ग्राहक इसे चाँदी समझकर खरीदते और खाते हैं। यदि किसी उत्पाद को खाद्य उपयोग के लिए बेचा जा रहा है, तो उसकी वास्तविक संरचना और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है।
बाजार से खरीदे गए नमूनों की पड़ताल
रिपोर्ट में गोल बाजार से सदर बाजार तक दुकानों से नमूने खरीदकर जाँच किए जाने का उल्लेख है। अलग-अलग ब्रांड के वर्क की जाँच के दौरान सामने आए परिणामों ने बाजार में बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर सवाल
चाँदी के वर्क के नाम पर एल्युमिनियम या अन्य धातु का इस्तेमाल किए जाने की आशंका उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है। सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली धातु की पत्तियाँ और खाद्य उपयोग के लिए उपयुक्त वर्क एक जैसी चीजें नहीं हैं। किसी सामग्री को सिर्फ उसकी चमक या रंग देखकर खाने योग्य नहीं माना जा सकता।
इस मामले में संबंधित उत्पादों की संरचना, खाद्य-ग्रेड प्रमाणन और लागू मानकों के अनुरूपता की पुष्टि महत्वपूर्ण है। प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
संदीप शुक्ला के स्टिंग ऑपरेशन ने उठाए सवाल
Raw Reporter के पत्रकार संदीप शुक्ला द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन और जाँच ने मिठाइयों पर इस्तेमाल होने वाले चाँदी के वर्क की गुणवत्ता को लेकर एक अहम जनहित का मुद्दा सामने रखा है। अब सवाल यह है कि बाजार में खाद्य उपयोग के नाम पर बिकने वाले ऐसे उत्पादों की नियमित जाँच कितनी प्रभावी है और उपभोक्ताओं को असली तथा नकली वर्क के बीच अंतर बताने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जाँच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित विभागों की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
रिपोर्ट: संदीप शुक्ला | Raw Reporter