मिल्की मलाई पनीर फिर जाँच में फेल, इधर अभी भी छत्तीसगढ़ के रायपुर और ओडिशा में धड़ल्ले से सप्लाई
RAIPUR NEWS. पूरे छत्तीसगढ़ में एनालॉग यानी पनीर जैसे दिखने वाले वैकल्पिक उत्पाद पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, आरोप है कि पहले ऐसे उत्पाद बनाने वाले कुछ फैक्ट्री संचालक अब भी कथित तौर पर मिलावटी सामग्री से पनीर जैसा उत्पाद तैयार कर रहे हैं। यह उत्पाद छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों के साथ ओडिशा में भी खपाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
खाद्य नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने ऐसे कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारी सस्ते पनीर जैसे उत्पाद बनाने वालों को संरक्षण दे रहे हैं। इस बीच विभाग की ओर से कुछ कार्रवाई भी की गई है। बीते दो महीनों में कई नमूने जाँच के लिए लिए गए, जिनमें कुछ निर्धारित मानकों पर खरे उतरे, जबकि कुछ नमूने फेल हुए।
मिल्की मलाई का पनीर एक बार फिर जाँच में फेल!
अप्रैल में जाँच में फेल होने के बाद अब रायपुर के कन्हेरा स्थित एसजे फूड्स (SJ Foods) में निर्मित मिल्की मलाई ब्रांड का पनीर जैसा उत्पाद खाद्य विभाग की जाँच में एक बार फिर ‘सब-स्टैंडर्ड’ यानी अमानक पाया गया है।
जाँच रिपोर्ट के अनुसार, नमूने में निर्धारित मानक की तुलना में फैट कम पाया गया। वहीं, नमी की मात्रा भी निर्धारित अधिकतम सीमा से ज्यादा दर्ज की गई। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
रिपोर्ट में बी.आर. (B.R.) रीडिंग 43.9 दर्ज की गई है, जबकि निर्धारित सीमा 40 से 44 है। यानी इसका परिणाम अधिकतम सीमा के बेहद करीब है। इसी तरह, निकाले गए फैट का आयोडीन वैल्यू 37.02 दर्ज किया गया, जबकि निर्धारित सीमा 25 से 38 है। यह परिणाम भी अधिकतम सीमा के करीब है।
इन नतीजों को लेकर पनीर कारोबारियों के बीच चर्चा है।
हाल ही में अमृतमय ब्रांड के पनीर का नमूना भी अमानक पाए जाने की बात सामने आई थी।

एक ही तरह के उत्पादों की जाँच में अलग-अलग मापदंड?
खाद्य विभाग की कुछ जाँच रिपोर्टों को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या समान श्रेणी के उत्पादों के नमूनों की जाँच एक जैसे मापदंडों के आधार पर की जा रही है। आरोप है कि अलग-अलग नमूनों के लिए अलग-अलग परीक्षण किए गए।
इसे एक उदाहरण से समझिए—यदि एक ही कक्षा के दो समूहों की परीक्षा के लिए अलग-अलग प्रश्नपत्र बनाए जाएँ और एक समूह को अपेक्षाकृत आसान प्रश्नपत्र मिले, तो परिणामों की निष्पक्ष तुलना पर सवाल उठना स्वाभाविक है
पहले भी कार्रवाई के दायरे में आ चुका है मिल्की मलाई
अप्रैल में खाद्य विभाग ने केएलपी डेयरी (KLP Dairy) और मिल्की मलाई की फैक्ट्री एसजे फूड्स में छापा मारा था। उस दौरान बड़ी मात्रा में तेल के टीन, फैट की डलियाँ और दूध पाउडर बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद एक हजार किलोग्राम से अधिक पनीर जैसे उत्पाद को नष्ट किए जाने की खबर भी प्रकाशित हुई थी। इस मामले को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इन दोनों कंपनी के पनीर नकली यानी एनालॉग पाये गए थे।
अब दोबारा नमूना अमानक पाए जाने के बाद निर्माण प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई सामग्री और पूर्व की कार्रवाई के संबंध में आगे की जाँच महत्वपूर्ण हो जाती है।
ओडिशा में सप्लाई को लेकर उठ रहे सवाल
ओडिशा में पनीर की माँग का फायदा उठाकर वहाँ पनीर जैसे वैकल्पिक उत्पादों की आपूर्ति किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। शिकायतों के अनुसार, पिकअप वाहनों के माध्यम से बड़ी मात्रा में ऐसा माल ओडिशा पहुँचाया जाता है।
रायपुर से आशीष जायसवाल, आशीष गुप्ता, हिमांशु, अंकुर, अंशु बंसल, सौरभ शर्मा, हुकुमचंद बंसल, कल्ली, प्रकाश देवांगन और गोपी चावला सहित कुछ कारोबारियों के नाम इस आपूर्ति के संबंध में सामने आए हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ कारोबारी मध्य प्रदेश के शमशाद से पनीर जैसा उत्पाद खरीदकर ओडिशा भेजते हैं। दावा है कि यह माल कवर्धा और महासमुंद के रास्ते ओडिशा पहुँचता है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, संबंधित कारोबारियों का पक्ष और परिवहन एवं खरीद-बिक्री के दस्तावेजों की जाँच जरूरी है।
इस पूरे मामले में यह भी पता चला है की ओडिशा में राहुल बंसल ओडिशा में बड़ी कटरा में एनालॉग यानी नक़ली पनीर का सप्लाई करता है। इसके लिए उसने एक से ज़्यादा ब्रांड बना रखा है । राहुल बसंल का भाई रायपुर में जबकि वह ओडिशा में डील करता है । ऐसे में रायपुर में नकली पनीर पकड़े जाने पर उसके भाई का नाम सामने आता है और राहुल बंसल बच जाता है । ओडिशा के कारोबारी यह जान ही नहीं पाते ही जो नकली पनीर पकड़ा गया या ओडिशा सप्लाई हो रहा है वह राहुल
बंसल का है है । ऐसे वो ओडिशा के लोगों की आंखो में धूल झोंक रहा है
ओडिशा में एनालॉग उत्पादों पर प्रतिबंध की स्थिति पर सवाल
ओडिशा में एनालॉग उत्पादों को लेकर लागू नियमों और उनके प्रवर्तन की स्थिति भी जाँच का विषय है। आरोप है कि बादल, राहुल बंसल, रानी और शोभित सहित कुछ कारोबारी वहाँ लागू नियमों की स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। कोटपाड़ और भवानीपटना में भी पनीर जैसे वैकल्पिक उत्पादों के निर्माण की शिकायतें सामने आई हैं।
यदि किसी उत्पाद में दूध के निर्धारित घटकों के स्थान पर वनस्पति वसा या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, तो उसकी पहचान और बिक्री पर लागू खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे जिस उत्पाद को पनीर समझकर खरीद रहे हैं, उसकी वास्तविक संरचना क्या है और लेबल पर क्या जानकारी दी गई है।
ओडिशा के खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका भी जाँच के दायरे में
छत्तीसगढ़ से ओडिशा में पनीर जैसे उत्पादों की कथित आपूर्ति को लेकर ओडिशा के खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि बड़ी मात्रा में अमानक या नियमों के विपरीत उत्पाद दूसरे राज्य में पहुँच रहे हैं, तो परिवहन, भंडारण, बिक्री और निर्माण स्थलों की जाँच आवश्यक है।
इस मामले में संबंधित अधिकारियों की लापरवाही, मिलीभगत या निगरानी में कमी की आशंका की पुष्टि दस्तावेजों और जाँच के आधार पर ही की जा सकती है।
नुआखाई और दशहरा में 100 टन से अधिक सप्लाई का दावा
ओडिशा के प्रमुख त्योहार नुआखाई और दशहरा के दौरान पनीर जैसे उत्पादों की माँग बढ़ने की बात कही जा रही है। आरोप है कि नुआखाई के लिए चौबीसों घंटे उत्पादन करके अलग से माल तैयार किया गया और रायपुर में सक्रिय कुछ कारोबारियों ने ओडिशा में बड़ी मात्रा में उत्पाद भेजा।
दावा किया गया है कि अकेले नुआखाई के अवसर पर लगभग 50 हजार किलोग्राम ऐसा उत्पाद ओडिशा भेजा गया। नुआखाई और दशहरा के दौरान कुल आपूर्ति 100 टन से अधिक होने का भी दावा है। इन आँकड़ों की पुष्टि के लिए उत्पादन रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, खरीद-बिक्री के बिल और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड की जाँच आवश्यक है।
खबर जोरदार की पड़ताल: एक-एक कड़ी का होगा खुलासा
पनीर जैसे उत्पादों की कथित मिलावट, निर्माण प्रक्रिया, आपूर्ति नेटवर्क और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से जुड़े सवालों की पड़ताल जारी है।
खबर जोरदार इस मामले की एक-एक कड़ी सामने लाने का प्रयास करेगा। उपलब्ध दस्तावेजों, जाँच रिपोर्टों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के आधार पर संबंधित कारोबारियों, निर्माण इकाइयों और आपूर्ति नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
हमारा उद्देश्य है कि उपभोक्ताओं तक सही जानकारी पहुँचे, खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित हो और यदि कहीं अनियमितता हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।