Land Use Rules रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में करीब चार दशक बाद बड़ा बदलाव किया गया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने भूमि उपयोग (Land Use) की अलग-अलग श्रेणियों के लिए नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसकी अधिसूचना आज राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है।
नए प्रावधानों के तहत कृषि, आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और सार्वजनिक/अर्ध-सार्वजनिक भूमि उपयोग श्रेणियों में नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यानी अब किसी भूमि उपयोग श्रेणी में सभी गतिविधियों को सामान्य तौर पर अनुमति योग्य माना जाएगा, लेकिन जो गतिविधियां प्रतिबंधित सूची में होंगी, उन्हें अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक होंगी। यह पहल राज्य में डी-रेगुलेशन और अनुपालन का बोझ कम करने से जुड़े व्यापक सुधारों का हिस्सा है। इससे मास्टर प्लान में तय भूमि उपयोग को बदलती जरूरतों के मुताबिक ज्यादा लचीला और व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी।
आवासीय जमीन पर सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता
आवासीय भूमि उपयोग के तहत प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और बड़े जोखिम वाली गतिविधियों को अनुमति नहीं मिलेगी। इसके अलावा बड़े भंडारण केंद्र, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल और थोक व्यापार जैसी गतिविधियां भी प्रतिबंधित रहेंगी।
आवासीय क्षेत्रों में तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मत्स्य पालन, डेयरी और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। दाह संस्कार/कब्रिस्तान और खनन जैसी गतिविधियां भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
वाणिज्यिक जमीन पर भी कई गतिविधियों पर रोक
वाणिज्यिक भूमि उपयोग के लिए भी प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची तय की गई है। इसमें नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योग शामिल हैं। इसके साथ ही खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों का भंडारण, पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों को अनुमति नहीं मिलेगी। दाह संस्कार/कब्रिस्तान और खनन गतिविधियां भी वाणिज्यिक क्षेत्र में प्रतिबंधित रहेंगी।
औद्योगिक जमीन पर नहीं बनेगी सामान्य टाउनशिप
औद्योगिक भूमि उपयोग के लिए भी नई व्यवस्था में कई स्पष्ट प्रतिबंध तय किए गए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप विकसित करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि अनुमत कर्मचारी आवास को अलग रखा गया है। इसके अलावा कुछ प्रकार के छात्रावास, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल और थोक व्यापार जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील या असंगत गतिविधियों को भी औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है।
कृषि जमीन पर बड़े मॉल और हाई डेंसिटी हाउसिंग पर रोक
कृषि भूमि के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट व्यवस्था प्रस्तावित की है। कृषि भूमि पर आवासीय अभिविन्यास, किफायती जन आवास और एकीकृत उपनगर जैसी निर्धारित श्रेणियों को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर विकसित करने की अनुमति नहीं होगी। खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों पर भी रोक रहेगी।
सार्वजनिक, परिवहन और मनोरंजन क्षेत्र के लिए भी नियम
सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक, परिवहन और आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए भी असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रदूषणकारी, खतरनाक और अत्यधिक भार पैदा करने वाली गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास जरूरतों के बीच बेहतर संतुलन बनाना है।
सरकार ने 15 दिन में मांगी आपत्ति और सुझाव
सरकार ने इस बदलाव को लेकर आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके लिए 15 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। इस अवधि में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यह होगा कि जमीन के उपयोग को लेकर व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक लचीली हो सकती है। किसी गतिविधि को अनुमति देने के लिए केवल सकारात्मक सूची पर निर्भर रहने के बजाय अब प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची को आधार बनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भूमि उपयोग की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ विकास गतिविधियों को गति देना है। वहीं संवेदनशील, प्रदूषणकारी, खतरनाक या संबंधित भूमि उपयोग से असंगत गतिविधियों पर रोक जारी रहेगी।