पनीर फैक्ट्री पर छापे में ‘खेल’! रात की कार्रवाई, सुबह सैंपल; सफाई के बाद जांच, जब्ती भी पूरी नहीं.. उठे सवाल
CHHATTISGARH NEWS. रायपुर/महासमुंद। महासमुंद के भलेसर रोड स्थित जिस पनीर बनाने वाली फैक्ट्री वैद्या फूड प्रोडक्ट में जिला प्रशासन की टीम ने छापेमारी की है, उसमें खाद्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहा है।
पहली बात तो यह कि 3 एकड़ में संचालित हो रही फैक्ट्री में खाद्य विभाग ने कभी भी अचानक दबिश नहीं दी। एनालॉग प्रतिबंधित होने के बाद भी अधिकारी यहां जांच के लिए नहीं पहुंचे, जबकि फैक्ट्री संचालक शोभित सिंह कुम्हारी में एनालॉग की फैक्ट्री संचालित करता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री रात में ही चलती थी। इससे आशंका बढ़ जाती है कि ऐसा क्या कारण था कि दिन की बजाय फैक्ट्री रात में संचालित की जा रही थी। खुद खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार संचालक शोभित सिंह पूर्व में कुम्हारी में एनालॉग फैक्ट्री चला रहा था और पनीर के नाम पर बेच रहा था, लेकिन एसपी विजय अग्रवाल की कार्रवाई के बाद कुम्हारी छोड़कर महासमुंद आ गया और यहां फैक्ट्री शुरू कर ली।


अब यहां बताना जरूरी होगा कि मिलीभगत की आशंका से कलेक्टर महासमुंद विनय लहंगे ने देर रात जिला प्रशासन के अधिकारी के नेतृत्व में छापेमारी कार्रवाई के निर्देश दिए। खाद्य विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी गई, ताकि किसी प्रकार से छापे की सूचना बाहर न आए। खाद्य विभाग के अधिकारी रात को मौके पर पहुंचे।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने खुद देखा कि पनीर की लूज डल्लियां पानी में गंदगी के बीच डूबी हुई हैं। इसका वीडियो भी सामने आया है। नियमत: अधिकारियों को रात को ही पनीर जैसे दिखने वाले पदार्थ का सैंपल लेना था, लेकिन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। जबकि यह नियम है।

रात साढ़े 11 बजे से ढाई बजे तक चली कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई ने सैंपल नहीं लिए और वापस लौट गए। अगले दिन सुबह टीम दोबारा पहुंची, तब जाकर अधिकारियों ने फैक्ट्री में मिले माल का सैंपल लिया।

लेकिन इस दौरान फैक्ट्री में पूरी तरह से सफाई की जा चुकी थी। टंकियां पलटकर पानी और बाकी बचा सामान फेंक दिया गया था। रात को जिन टंकियों में गंदे पानी में पनीर जैसा पदार्थ बर्फ में डुबोकर रखा गया था, वे खाली कर साफ की जा चुकी थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री के ठीक पीछे बड़ा नाला उफान पर है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि ज्यादातर माल हटाया गया हो सकता है।

ऐसे में आरोपियों को कोर्ट में यह पक्ष रखने का आधार मिल सकता है कि मौके पर सैंपल नहीं लिया गया। सूत्रों के अनुसार (अभीहित अधिकारी) DO उमेश वर्मा उस समय जिला मुख्यालय में नहीं थे। इसलिए कलेक्टर के आदेश के बाद भी वह मौके पर नहीं पहुंचे।

दूसरी बड़ी गड़बड़ी यह थी कि फैक्ट्री में बड़ी संख्या में UTKAL उत्कल ब्रांड के प्लास्टिक के पैकेट थे, जिसे पनीर पैक करने के लिए रखा गया था। खुद फैक्ट्री संचालक शोभित सिंह ने अधिकारियों को बताया कि इस उत्कल ब्रांड का कहीं भी पंजीयन नहीं किया गया है।

यानी बिना रजिस्टर्ड नाम और ब्रांड के पनीर पैक कर बेचा जा रहा था। पैकेट में पनीर की पोषण संबंधी जानकारी थी, लेकिन फैक्ट्री में कोई लैब भी नहीं थी, जो यह बता सके कि तैयार माल में क्या मिलाया गया और उसमें प्रोटीन समेत पोषक तत्व हैं या नहीं।

नियम से अधिकारियों को इन पैकेट को भी जब्त कर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करनी थी, लेकिन DO उमेश वर्मा ने खुद मौजूद होने के बाद भी यह कार्रवाई नहीं की और सिर्फ तैयार माल का सैंपल लेकर निकल गए। पैकेजिंग वाले प्लास्टिक पैकेट वहीं छोड़ दिए गए।

फैक्ट्री में पीछे बॉयलर और अन्य मशीनें थीं, जिसमें हर तरफ चिकनाई मौजूद थी। साफ समझ आ रहा था कि यहां किसी प्रकार का तेल इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इस मामले में भी जांच नहीं की गई।


इन गड़बड़ियों से अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन लापरवाहियों की सारी जानकारी खाद्य विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंच गई है। देखने वाली बात होगी कि नकली पनीर बनाने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने वाला खाद्य विभाग लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

इसलिए भी फैक्टरी मालिक के दावे पर संदेह
फैक्टरी में बताए जा रहे पनीर की कीमत और उसे बनाने में आने वाली वास्तविक लागत के बीच बड़ा अंतर नजर आता है।
एक किलो असली पनीर बनाने में सामान्य तौर पर करीब 5 से 5.5 लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। सबसे सस्ते फैट वाले दूध की कीमत भी करीब 65 रुपए लीटर है, जबकि फैक्टरी संचालक खुद 62 रुपए लीटर की दर से दूध खरीदने की बात बता रहे हैं।
यानी 5 लीटर दूध की लागत ही करीब 310 रुपए बैठती है। इसके अलावा करीब 20 रुपए लेबर और 15 रुपए पैकेजिंग व ट्रांसपोर्ट जोड़ दें तो लागत लगभग 345 रुपए प्रति किलो हो जाती है।
दूसरी तरफ, फैक्टरी के मैनेजर के मुताबिक 4 किलो दूध और SMP (Skimmed Milk Powder) से उत्पाद तैयार किया जाता है। SMP की कीमत करीब 350 रुपए किलो बताई गई है। यदि 4 किलो दूध के साथ लगभग 750 ग्राम SMP इस्तेमाल किया जाए, तो सिर्फ दूध और SMP की लागत करीब 510 रुपए बैठती है—
दूध 248 रुपए + SMP 262 रुपए।
ऐसे में 230 रुपए प्रति किलो में असली पनीर तैयार होने का दावा सवाल खड़ा करता है। खासकर तब, जब फैक्टरी की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि करीब 230 रुपए की लागत में तैयार कर इसे 290 रुपए किलो में बेचा और बिल किया जा रहा है।
वहीं, पाम ऑयल, फैट और SMP जैसी चीजों से एनालॉग उत्पाद तैयार करने की लागत इससे काफी कम हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब एक किलो SMP में तेल और फैट मिलाकर 1.1 किलो से ज्यादा एनालॉग उत्पाद तैयार किया जा सकता है।
यही वजह है कि 230 रुपए में असली पनीर तैयार करने और 290 रुपए में बेचने के दावे पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। लागत का यह अंतर कहीं इस बात की ओर तो इशारा नहीं करता कि पनीर के नाम पर एनालॉग उत्पाद को ही पनीर बताकर बेचा जा रहा था?
हालांकि अंतिम निष्कर्ष उत्पाद की लैब जांच और दस्तावेजों की जांच के बाद ही निकलेगा।
