रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ED ने उन्हें प्रोडक्शन वारंट के तहत गिरफ्तार किया है। अब कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे पूछताछ की जाएगी।
गिरफ्तारी के बाद ED रामगोपाल अग्रवाल को विशेष अदालत में पेश करेगी। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी पूछताछ के लिए उनकी 7 दिन की रिमांड मांग सकती है। कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें जेल से कोर्ट लाया जाएगा।
शराब घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में पूछताछ
ED की कार्रवाई छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत हुई है। एजेंसी इस मामले में पहले भी कई आरोपियों और संबंधित लोगों से पूछताछ एवं कार्रवाई कर चुकी है।
ED के वकील सौरभ पांडेय ने रामगोपाल अग्रवाल को ED हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है। अब कोर्ट में पेशी के दौरान जांच एजेंसी उनकी कस्टडी की मांग कर सकती है।
EOW ने भी की थी गिरफ्तारी
रामगोपाल अग्रवाल इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। EOW के मुताबिक, शराब घोटाले, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े पैसों को कथित तौर पर ठिकाने लगाने में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
रामगोपाल अग्रवाल करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद 8 जुलाई को EOW-ACB कार्यालय पहुंचे और सरेंडर किया था। इसके बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें पहले पुलिस रिमांड पर भेजा था। बाद में रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा गया।
भूपेश बघेल ने जेल में की थी मुलाकात
रामगोपाल अग्रवाल के जेल जाने से पहले 25 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी।
मुलाकात के दौरान भूपेश बघेल ने आरोप लगाया था कि राजनीतिक रूप से कांग्रेस को बदनाम करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच ED और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW)-एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की जा रही है। मामले में सरकारी शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं, अवैध वसूली और पैसों के लेन-देन की जांच हो रही है।
ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़े कथित नेटवर्क के जरिए शराब कारोबार में अनियमितताएं की गईं।
डुप्लीकेट होलोग्राम से शराब बेचने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से कथित तौर पर डुप्लीकेट होलोग्राम लगी शराब की बिक्री की गई। एजेंसियों का दावा है कि इससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और जांच के निष्कर्षों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब ED की पूछताछ महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोर्ट में पेशी के दौरान यदि ED को रिमांड मिलती है, तो एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, पैसों के लेन-देन और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर उनसे पूछताछ कर सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि ED की पूछताछ और अदालत की सुनवाई के दौरान इस मामले में आगे क्या जानकारी सामने आती है।