रायपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) के विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा में अधिकारियों ने भर्राशाही मचा रखी है। पहले ही खुलासा हो चुका है की विभाग के कुछ अधिकारी शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ब्लैकलिस्टेड फर्म को करोड़ों रुपये के ठेके बांट रहे हैं। ताजा मामले में अधिकारियों ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा वर्ष 2023 में पांच वर्षों के लिए प्रतिबंधित की जा चुकी “श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स” नामक फर्म को 13 करोड़ रुपये से अधिक के कई ठेके दे दिए हैं। अब जो दस्तावेज सामने आए है उससे पता चल रहा है की अपनी चहेती ब्लैकलिस्टेड (काली सूची में शामिल) फर्म को sky walk (स्काई वॉक ) में करोडों का ठेका देने के लिए बकायदा नियमों में बदलाव किया गया। काली सूची की समय सीमा कम की गई। यह भी खुलासा हो रहा है की इस भ्रष्टाचार की रूपरेखा पहले ही तैयार ली गई थी।
चहेती ब्लैक लिस्टेड कंपनी को ठेका देने रचा खेल
आरोप है की साल 2023 में पांच वर्षों के लिए यानी साल 2028 तक प्रतिबंधित होने के बावजूद कुछ अधिकारियों ने मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को ठेका देने के लिए खेल रचा है। जो दस्तावेज सामने आए है उससे साफ है की श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को स्काई वॉक में 3 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का एस्कालेटर लगाने देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए बकायदा फर्म को माध्यम बनाकर kone कंपनी से 3 करोड़ 15 लाख रुपए का प्रपोजल कोटेशन दिलवाया गया है। प्रपोजल की तारीख 19 मार्च 2026 है। नीचे आप इससे जुड़े दस्तावेज देख सकते हैं।



ऐसे हुए खेल –
अब आप को बताते हैं बड़ा खेल, असल में श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को करोड़ों का काम देने की तैयारी एक अधिकारी ने पहले ही कर रखी थी। कुछ और दस्तावेज सामने आए है, यह 28 मार्च 2025 का एक प्रपोजल है जिसमें इसी श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स के नाम से kone कंपनी द्वारा स्काई वॉक के एस्कालेटर का प्रपोजल दिया हुआ है। जिसकी कीमत 4 करोड़ 5 लाख 20 हजार है। यह वो समय है जिस दौरान श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को वर्ष 2023 से लेकर 2028 तक बिलासपुर स्मार्ट सिटी ने कंपनी को आगामी पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। साथ ही उसकी निविदा सुरक्षा राशि जब्त कर उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। यानी अगले पांच वर्षों तक श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स किसी भी शासकीय टेंडर में भाग लेने के योग्य नहीं थी।



श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने काली सूची की समय सीमा घटाई-
क्या आपने देखा है की किसी अपराधी को पहले 5 साल की सजा मिले उसके बाद सजा को घटाकर 2 साल कर दिया गया हो। यह कमाल श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने राज्य के कुछ अधिकारियों ने किया है।
असल में वर्ष 2023 में श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स कंपनी के संचालकों ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के साथ भी कथित धोखाधड़ी की थी, जो जांच में पकड़ी गई। असल में टेंडर के लिए फर्म को बैंक सॉल्वेंसी जमा करनी थी। कंपनी का खाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, देवपुरी शाखा में था। फर्म को वहीं से सॉल्वेंसी प्रमाण-पत्र बनवाना था, लेकिन संचालकों ने कथित तौर पर पुरानी सॉल्वेंसी में कूटरचना कर एडिटिंग के माध्यम से नई एंट्री जोड़ दी और तीन करोड़ रुपये की फर्जी सॉल्वेंसी तैयार कर जमा कर दी। हालांकि स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने जांच में इसे पकड़ लिया।
स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने सॉल्वेंसी दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बैंक को ई-मेल भेजा। जवाब में बैंक ने जानकारी दी कि संबंधित सॉल्वेंसी दस्तावेज जारी ही नहीं किए गए थे और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। इसके बाद स्मार्ट सिटी के MD ने 18 नवंबर 2023 को श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को पांच वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
लेकिन अब एक एक नया दस्तावेज सामने आया है, 9 दिसंबर 2025 को जनरल मैनेजर टेक्निकल बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है। इस पत्र में श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स पर लगाए गए 5 साल के प्रतिबंध को घटाकर 2 साल कर दिया गया। यानी प्रतिबंध सिर्फ 2025 तक ही लागू रहेगा। इसके बाद शुरु की गई श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को नया ठेका देना की तैयारी जो की स्काई वॉक में एस्कालेटर लगाने के 3 करोड़ 15 लाख रुपए के ठेके से समझ आ रहा है।
यह अकेले नहीं ब्लैक लिस्टेड रहने के दौरान दर्जनों काम बांटे गए फर्म को-
श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को फाय़दा पहुंचाने का यह अकेले प्रकरण नहीं है। कहने को इस फर्म को साल 2023 से 2028 तक ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था। पिछले दरवाजे से इसकी काली सूची की समयावधी 2025 कर दी गई लेकिन अब ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जो बताता है की फर्म को प्रतिबंध के दौरान भी करोड़ों रुपए के दर्जनों काम दिए गए। इसका खुलासा अगली खबर में करेंगे।
अधिकारी और फर्म पर लगा चुके हैं पहले भी आरोप
PWD के टेंडर नियमों, शर्तों और स्मार्ट सिटी से प्राप्त दस्तावेजों के मिलान से खुलासा हुआ है कि अधीक्षण अभियंता स्तर के कुछ अधिकारियों ने अपनी चहेती कंपनी को ठेका देने के लिए गड़बड़ी की। वहीं, ठेका हासिल करने के लिए मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स के संचालकों ने झूठा शपथ-पत्र प्रस्तुत कर शासन के साथ धोखाधड़ी भी की है। कंपनी ने विभाग को शपथ-पत्र देकर घोषणा की थी कि वह राज्य के किसी भी विभाग द्वारा प्रतिबंधित नहीं है, जबकि वर्ष 2023 में बिलासपुर स्मार्ट सिटी ने कंपनी को आगामी पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। साथ ही उसकी निविदा सुरक्षा राशि जब्त कर उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। यानी अगले पांच वर्षों तक श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स किसी भी शासकीय टेंडर में भाग लेने के योग्य नहीं थी। इसके बावजूद कंपनी को करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए।
ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी अलग-अलग शहरों में करोड़ों के काम
वर्ष 2023 में पांच वर्षों के लिए प्रतिबंधित होने के बावजूद अधिकारियों ने मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को रायपुर, धमतरी, कुरूद, बिलासपुर और नवा रायपुर क्षेत्र में बिजली लाइन शिफ्टिंग, विद्युतीकरण, उपकेंद्र निर्माण, वातानुकूलन प्रणाली और फ्लड लाइट लगाने जैसे कार्यों के ठेके नियम विरुद्ध तरीके से दिए। इसके चलते पूरी निविदा प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। यह कहना गलत नहीं होगा कि नियमों को दरकिनार कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स के कार्यकाल के दौरान SE सुरेश भूपल ही प्रभार में रहे हैं। ठेकेदार से उनके करीबी संबंध बताए जाते हैं। वर्ष 2016 में जब सुरेश भूपल रायपुर में EE के पद पर पदस्थ थे, तभी से उनका कंपनी से परिचय था। पूर्व में भूपल के कार्यकाल के दौरान मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को स्काई वॉक में एस्केलेटर सप्लाई का काम दिया गया था। स्काई वॉक परियोजना बंद होने के बाद भी लिफ्ट मंगवाकर कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। वर्तमान में ये लिफ्टें वर्षों से पड़ी-पड़ी कंडम हो चुकी हैं। मॉडल आउटडेटेड होने के कारण अब उनका उपयोग भी संभव नहीं है।
विभागीय जानकारों के अनुसार, किसी भी टेंडर को खोलने और उसकी जांच करने का अधिकार SE के पास होता है। इसके बावजूद इतनी अनियमितताओं के बाद भी अधिकारियों द्वारा मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को दर्जनों काम दिए गए।
ठेकेदार के साथ ट्रिप की तस्वीर वायरल
मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स के संचालक और अधीक्षण अभियंता सुरेश भूपल के करीबी होने की चर्चा आम है। टेंडर घोटाले की चर्चाओं के बीच सुरेश भूपल और संचालक पीयूष सोमानी की ट्रिप की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। तस्वीरें बेंगलुरु की बताई जा रही हैं।
[Image: टेंडर घोटला की चर्चा के साथ ही ठेकेदार और अधिकारी की अलग-अलग ट्रिप की फोटो वायरल हो रही हैं]
SE सुरेश भूपल से करीबी संबंधों का आरोप
विभागीय सूत्रों के अनुसार, मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स के विभाग के SE सुरेश भूपल से बेहद करीबी संबंध हैं। वर्ष 2016 में जब सुरेश भूपल रायपुर में EE के पद पर पदस्थ थे, तभी से कंपनी से उनके संबंध बताए जा रहे हैं। पूर्व में भूपल ने श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को स्काई वॉक में एस्केलेटर सप्लाई का काम दिलाया था। स्काई वॉक परियोजना बंद होने के बाद भी लिफ्ट मंगवाकर कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। वर्तमान में ये लिफ्टें वर्षों से पड़ी-पड़ी कंडम हो चुकी हैं। मॉडल आउटडेटेड होने के कारण अब उनका उपयोग भी संभव नहीं है।
भूपल के कार्यकाल में खंभों का ठेका, करोड़ों का खेल, पांच साल में ही सड़ गए पोल
[Image: एक्सप्रेस-वे में सड़ कर गिरे पांच साल पहले लगाए गए बिजली के खंभे]
एक्सप्रेस-वे निर्माण के दौरान केंद्री तक बिजली के पोल लगाने का ठेका मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को दिलाया गया था। आमतौर पर GI खंभों की कीमत लगभग 30 हजार रुपये होती है, लेकिन कंपनी को एक-एक खंभे के लिए सवा लाख रुपये तक का भुगतान किया गया। पूरी सड़क में 300 से अधिक खंभे लगाए गए, जिनकी कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है।
आज शहर में 20 से 25 वर्ष पुराने खंभे जस के तस खड़े हैं, जबकि स्टेशन से केंद्री तक एक्सप्रेस-वे में लगाए गए बिजली के पोल सड़ने के कारण एक-एक कर गिर रहे हैं। स्टेशन से शदाणी दरबार तक 60 से अधिक पोल गिर चुके हैं। दो दिनों के भीतर स्टेशन से पंडरी के बीच एक फ्लाईओवर पर ही छह से अधिक खंभे गिर गए। इससे मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स द्वारा लगाए गए खंभों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने GI की बजाय MS के खंभे लगाए थे। साथ ही खंभों की चादर की मोटाई और गैल्वेनाइजिंग में भी गड़बड़ी की गई, जिसके कारण खंभे जल्दी सड़ गए। इससे फ्लाईओवर से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। उस समय भी सुरेश भूपल EE के पद पर पदस्थ थे।
झूठे शपथ-पत्र पर दिया ठेका, जबकि होनी थी FIR
किसी भी सरकारी ठेका प्राप्त करने के लिए कंपनी को शपथ-पत्र देना होता है कि उसके द्वारा दी गई जानकारी सही है और वह किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं है। यदि शपथ-पत्र में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके बावजूद कंपनी संचालकों ने शपथ-पत्र में दावा किया कि उनकी कंपनी किसी भी सरकारी विभाग में ब्लैकलिस्टेड नहीं है, जबकि बिलासपुर स्मार्ट सिटी द्वारा वर्ष 2023 में जारी आदेश में कंपनी को पांच वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया जा चुका था। अधिकारियों को इस मामले में कंपनी संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज करनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत कंपनी को करोड़ों रुपये के ठेके दे दिए गए।
[Image: ठेकेदार द्वारा जमा किया गया झूठा शपथपत्र जिसमें राज्य में कही भी ब्लैकलिस्ट होने की बात छिपाई गई]
बिलासपुर स्मार्ट सिटी के साथ भी की थी धोखाधड़ी
श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स द्वारा शासन के साथ धोखाधड़ी करने का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2023 में कंपनी के संचालकों ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के साथ भी कथित धोखाधड़ी की थी, जो जांच में पकड़ी गई।
टेंडर के लिए फर्म को बैंक सॉल्वेंसी जमा करनी थी। कंपनी का खाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, देवपुरी शाखा में था। फर्म को वहीं से सॉल्वेंसी प्रमाण-पत्र बनवाना था, लेकिन संचालकों ने कथित तौर पर पुरानी सॉल्वेंसी में कूटरचना कर एडिटिंग के माध्यम से नई एंट्री जोड़ दी और तीन करोड़ रुपये की फर्जी सॉल्वेंसी तैयार कर जमा कर दी। हालांकि स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने जांच में इसे पकड़ लिया।
बैंक के ई-मेल ने खोली पोल
स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने सॉल्वेंसी दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बैंक को ई-मेल भेजा। जवाब में बैंक ने जानकारी दी कि संबंधित सॉल्वेंसी दस्तावेज जारी ही नहीं किए गए थे और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। इसके बाद स्मार्ट सिटी के MD ने 18 नवंबर 2023 को श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर्स को पांच वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
कंपनी संचालकों पर पहले से कई मामले
| क्रमांक | WPC नंबर | विभाग / विषय |
| 1 | WPC No. 15/2022 | छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड – ब्लैकलिस्टिंग / डिग्रेडेशन |
| 2 | WPC No. 3061/2021 | छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड – कॉन्ट्रैक्ट समाप्ति विवाद |
| 3 | WPC No. 2739/2022 | मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना – टेंडर / वर्क ऑर्डर विवाद |
| 4 | WPC No. 1791/2021 | CSPGCL – इलेक्ट्रिकल टेंडर / संशोधित LOI विवाद |
नियम विरुद्ध कहां मिले कितने के काम
- कंपनी को लोक निर्माण विभाग एवं विद्युत-यांत्रिकी शाखा से रायपुर, धमतरी, कुरूद, खरौरा और मरौद क्षेत्र में बिजली लाइन शिफ्टिंग एवं विद्युतीकरण से जुड़े लगभग 6 करोड़ रुपये के कार्य दिए गए।
- बिलासपुर E/M डिवीजन में खेल परिसर और विद्युत नवीनीकरण से जुड़े लगभग 4.87 करोड़ रुपये के कार्य दिए गए।
- नवा रायपुर एवं महासमुंद क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के दौरान बिजली लाइन शिफ्टिंग से जुड़े लगभग 2.15 करोड़ रुपये के कार्य दिए गए।
विभागीय अधिकारियों ने भी कंपनी के पहले से प्रतिबंधित होने की जानकारी मिलने की बात स्वीकार की है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है।
“शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी”
“हां, फर्म के ब्लैकलिस्टेड होने की मौखिक जानकारी मिली है, लेकिन अब तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई के लिए ईएनसी को लिखा जाएगा। कंपनी दूसरे विभाग में ब्लैकलिस्टेड है, इसकी जानकारी हमें कैसे मिलेगी? कंपनी संचालक ने गलत शपथ-पत्र पेश किया है, इसमें वह फंसेगा। नियमानुसार कार्रवाई होगी।”
— सुरेश भूपल, SE, लोक निर्माण विभाग, विद्युत एवं यांत्रिकी