PSC घोटाले में अब ED की एंट्री । सोनवानी की फिर होगी गिरफ्तारी। रिमांड मांगेगी ED
CGPSC Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को आज प्रोडक्शन वारंट पर अदालत में पेश किया जाएगा, जहां ED उनसे पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड की मांग करेगी।
सोनवानी फिलहाल इसी मामले में रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। ED का उद्देश्य अब केवल भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले में धन के लेन-देन (Money Trail), कथित रिश्वत और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं की जांच करना भी है।
क्या है पूरा मामला?
CGPSC 2021 भर्ती परीक्षा को लेकर आरोप लगे थे कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों और परिचितों को फायदा पहुंचाया। आरोपों के अनुसार चयन प्रक्रिया में कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला और प्रश्नपत्र लीक तथा प्रभाव के इस्तेमाल के जरिए सरकारी पद दिलाए गए।
CBI की जांच में आरोप लगाया गया कि सोनवानी के परिवार और करीबी लोगों का चयन महत्वपूर्ण पदों—जैसे डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी, जिला आबकारी अधिकारी और श्रम अधिकारी—पर हुआ। एजेंसी ने रिश्वत के लेन-देन और कथित साजिश से जुड़े आरोपों की भी जांच की।
EOW से CBI और अब ED
इस मामले की शुरुआत राज्य स्तर पर EOW की जांच से हुई थी। बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई। CBI ने नवंबर 2024 में टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया और उन्हें इस कथित भर्ती घोटाले का प्रमुख आरोपी बताया।
अब ED की एंट्री यह संकेत देती है कि एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित भ्रष्टाचार से अर्जित धन कहां गया, किसके खातों में पहुंचा और क्या इस मामले में धन शोधन (Money Laundering) के तत्व मौजूद हैं।
आज कोर्ट में क्या होगा?
सूत्रों के अनुसार ED आज अदालत से टामन सिंह सोनवानी की कस्टडी रिमांड मांगेगी ताकि उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके। एजेंसी उनके बैंक खातों, संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन, कथित रिश्वत और अन्य संदिग्ध आर्थिक दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाना चाहती है।
यदि अदालत ED की रिमांड मंजूर करती है तो जांच में कई नए नाम और आर्थिक लेन-देन सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
हाईकोर्ट भी जमानत दे चुका है खारिज
इस मामले में टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिकाएं पहले भी खारिज हो चुकी हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यदि भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह लाखों युवाओं के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर चोट है।
अब निगाहें ED की कार्रवाई पर
CGPSC भर्ती घोटाला पहले ही प्रदेश की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में शामिल है। अब ED की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी तक सीमित था या इसके पीछे बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क भी सक्रिय था।
आज अदालत में होने वाली सुनवाई और ED की रिमांड याचिका इस बहुचर्चित मामले की जांच को नई दिशा दे सकती है।