अलीगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने उपभोक्ता अधिकारों और बाजार में तय कीमतों के उल्लंघन को लेकर बड़ा संदेश दिया है। यहां एक सिगरेट पैकेट को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बेचना दुकानदार और सिगरेट निर्माता कंपनी दोनों पर भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों पर संयुक्त रूप से 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने का आदेश दिया गया है।
यह मामला बन्नादेवी थाना क्षेत्र के रघुवीरपुरी निवासी अधिवक्ता देवेश गौतम से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में उन्होंने अलीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग के सामने स्थित प्रतिभा कॉलोनी निवासी हीरालाल वार्ष्णेय की दुकान से सिगरेट का एक पैकेट खरीदा था। पैकेट पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 340 रुपये अंकित था, लेकिन दुकानदार ने उनसे 360 रुपये की मांग की।
देवेश गौतम के अनुसार, जब उन्होंने अधिक कीमत वसूलने का विरोध किया तो दुकानदार ने उनसे बहस की और सिगरेट देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने मजबूरी में ऑनलाइन माध्यम से 360 रुपये का भुगतान किया और डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रख लिया। बाद में उन्होंने इसका प्रिंट आउट लेकर फरवरी 2026 में जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ में हुई। आयोग ने इस मामले में दुकानदार के साथ-साथ संबंधित सिगरेट निर्माता कंपनी को भी नोटिस जारी किया। हालांकि सुनवाई के दौरान दुकानदार आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।
वहीं, कंपनी ने अपने बचाव में कहा कि संबंधित दुकानदार उसका अधिकृत विक्रेता नहीं है, इसलिए उसकी ओर से की गई किसी भी तरह की कालाबाजारी के लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन आयोग ने इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी ब्रांडेड कंपनी को अपने उत्पाद की बिक्री में हो रही अनियमितताओं और उपभोक्ता शोषण से पल्ला नहीं झाड़ना चाहिए।
आयोग ने इस कार्रवाई को अनुचित व्यापारिक आचरण और उपभोक्ताओं के साथ छिपी हुई लूट करार दिया। साथ ही आदेश दिया कि वसूले गए अतिरिक्त 20 रुपये को 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित शिकायतकर्ता को वापस किया जाए। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 5000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी देने का निर्देश दिया गया है।