CBSE Controversy: नई दिल्लीः सीबीएसई द्वारा इस वर्ष लागू की गई आनलाइन आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में है। वार्षिक परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर आई विसंगतियों के कारण देशभर के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अभी तक अधर में लटका है। विडंबना यह है कि मूल्यांकन में हुई इस गंभीर तकनीकी और मानवीय चूक का खामियाजा विद्यार्थियों को करीब 20 करोड़ रुपये का ‘हर्जाना’ भर कर भुगतना पड़ रहा है।
CBSE Controversy: एक अनुमान के मुताबिक, विद्यार्थियों को स्कैन कापियां उपलब्ध कराने, परिणाम सुधारने के लिए अंक सत्यापन (वेरिफिकेशन) और पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के नाम पर सीबीएसई के खाते में लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जमा हुआ है। इसमें लगभग 11.31 करोड़ स्कैन कापियों और लगभग नौ करोड़ रुपये अंक सत्यापन औरपुनर्मूल्यांकन के जमा हुए हैं।
इस वर्ष कापियों के डिजिटल मूल्यांकन के दौरान तकनीकी खामियां देखने को मिलीं। लाखों विद्यार्थियों ने जब अपनी स्कैन कापी में मिले अंकों को देखने के लिए आवेदन किया, तो उनमें कई को ई- मेल पर धुंधली उत्तर-पुस्तिकाएं जारी की गईं, कई विद्यार्थियों ने कापियों से पन्ने गायब होने का दावा किया और कुछ मामलों में तो दूसरे छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड कर दी गईं।
इस अव्यवस्था के कारण न केवल 12वीं के उत्तीर्ण प्रतिशत में गिरावट आई, बल्कि देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश की दौड़ से बाहर होने के डर से 1.6 लाख से अधिक छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना पड़ा।
CBSE Controversy: पुनर्मूल्यांकन : क्या-क्या हुआ
4,04,319 छात्रों ने मांगी 11,31,96 स्कैन कापियां
1.6 लाख से अधिक छात्रों ने 3.8 लाख उत्तरपुस्तिकाओं के अंक सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया
स्कैन कापी के लिए प्रति कापी 100 रुपये लिए गए
अंक सत्यापन के लिए प्रति कापी 100 रुपये लिए गए
पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये लिए गए।