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ऑपरेशन साइबर शील्ड : 300 से अधिक फर्जी सिम बेचने वाले 7 गिरोह सदस्य गिरफ्तार

रायपुर: पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज श्री अमरेश मिश्रा के निर्देशन में ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में रेंज साइबर थाना की टीम ने फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कुछ वेस्ट बंगाल, दुर्ग, बलौदा बाजार और रायपुर के रहने वाले हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में 300 से अधिक फर्जी सिम कार्ड की महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जो विभिन्न साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हो रहे थे।

फर्जी सिम बेचने वाले POS एजेंट और संवर्धक गिरफ्तारगिरफ्तार किए गए आरोपियों ने VI, Jio और Airtel के सिम कार्ड बेचने का काम किया। इनमें शामिल प्रमुख आरोपी इस प्रकार हैं:

 

सुदीप्त सासमल (36 वर्ष), साहू मोबाइल, भनपुरी, रायपुर (स्थायी पता: पांसकूड़ा, पूर्व मेदनीपुर, वेस्ट बंगाल)

शिवनारायण साहू (37 वर्ष), रुद्रा मोबाइल उरला एवं शिव कृपा मोबाइल, बलौदा बाजार

जयंत लहरी (31 वर्ष), लहरी मोबाइल, रिसाली, दुर्ग

मनीष आहूजा (39 वर्ष), आहूजा मोबाइल, महावीर नगर, रायपुर

कौशल प्रताप सिंह (38 वर्ष), नेयानी मोबाइल, जामुल, दुर्ग

सुधीर जैन (50 वर्ष), शिवानंद नगर, खमतराई, रायपुर

विनोद वर्मा (32 वर्ष), झंडा चौक, पंडरी, रायपुर

 

फर्जी सिम से हुए साइबर फ्रॉड

आरोपियों द्वारा बेचे गए फर्जी सिम कार्ड म्यूल बैंक खातों, टेलीग्राम रिव्यू टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, फेक सोशल मीडिया अकाउंट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और सस्ते सामान बेचने के बहाने किए जाने वाले साइबर अपराधों में इस्तेमाल हुए हैं।

दर्ज प्रकरण

प्रकरण 1: थाना माना, रायपुर (ग्रामीण) में अपराध क्रमांक 300/25 धारा-317(2), 317(4), 317(5), 3(5) बीएनएस के तहत दर्ज। इसमें 20.28 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत है, जिसमें इंडसइंड बैंक का म्यूल अकाउंट और फर्जी मोबाइल सिम संलिप्त पाए गए।

प्रकरण 2: थाना आजाद चौक, रायपुर में अपराध क्रमांक 283/25 धारा-317(2), 317(4), 317(5), 3(5) बीएनएस के तहत दर्ज। इसमें 6.42 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी दर्ज है, जिसमें साउथ इंडियन बैंक का म्यूल अकाउंट शामिल है।दोनों मामलों की जांच रेंज साइबर थाना रायपुर द्वारा की जा रही है।

फर्जी सिम बनाने का तरीका

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे ग्राहकों का डबल थंब स्कैन या आई ब्लिंक कर ई-केवाईसी के जरिए अतिरिक्त सिम एक्टिवेट करते थे। जिन ग्राहकों के पास आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी होती थी, उनका विवरण स्वयं वेरीफाई कर डी-केवाईसी के माध्यम से फर्जी सिम चालू कर देते थे। इन सिम को ऊंची कीमत पर अन्य साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।गिरफ्तार आरोपियों से प्री-एक्टिवेटेड सिम और 300 से अधिक फर्जी सिम की जानकारी मिली है, जिनका विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।सभी सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। पुलिस की टीम आगे भी ऐसे फर्जी सिम नेटवर्क पर सख्त नजर रखे हुए है।