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टॉप नक्सल कमांडर पापाराव ने किया सरेंडर, सक्रिय माओवादी नेटवर्क को लगा बड़ा झटका!

Naxal Leader Paparao Surrenders: छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक क्षेत्र के आखिरी बचे सीनियर माओवादी कमांडर पापाराव ने मंगलवार को सरेंडर कर दिया है. बताया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों के लगातार बढ़ते दबाव के चलते उसने आत्मसमर्पण का फैसला लिया. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.

पापाराव ने स्थानीय पत्रकार से किया संपर्क

Naxal Leader Paparao Surrenders: मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पापाराव ने सरेंडर की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक स्थानीय पत्रकार से संपर्क किया था. इसी माध्यम से उसने अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई और आत्मसमर्पण की शर्तों पर बातचीत शुरू हुई. बता दें, पिछले एक सप्ताह से सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण बस्तर में खुफिया जानकारी के आधार पर बड़े स्तर पर ऑपरेशन तेज कर दिए थे. इन अभियानों के कारण पापाराव की गतिविधियां सीमित हो गईं और उसका सपोर्ट नेटवर्क भी काफी कमजोर पड़ गया.

नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका

Naxal Leader Paparao Surrenders: अगर पापाराव के सरेंडर की पुष्टि होती है, तो इसे बस्तर क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जाएगा. लंबे समय से सक्रिय यह कमांडर इलाके में नक्सली गतिविधियों का अहम हिस्सा माना जाता रहा है.

पापाराव पर है 25 लाख का इनाम

सूत्रों के अनुसार, 25 लाख रुपये के इनामी और सीनियर माओवादी कमांडर पापराव, जिसे सुनाम चंद्राया, मंगू दादा और चंद्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है, आत्मसमर्पण कर चुका है, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, करीब 52-55 वर्षीय पापराव राज्य क्षेत्रीय समिति सदस्य (SZCM) होने के साथ-साथ पश्चिम बस्तर डिवीजन का प्रभारी भी है. बताया जा रहा है कि पापराव फिलहाल छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में सक्रिय है, जो लंबे समय से माओवादियों का गढ़ माना जाता रहा है. पहले जहां उसके पास 30-35 सशस्त्र कैडर थे, वहीं अब वह केवल 5 सदस्यों के छोटे समूह के साथ ही सक्रिय रह गया है.

Naxal Leader Paparao Surrenders:

हाल के सुरक्षा अभियानों ने उसके नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है. बीजापुर जिले में हुए ऑपरेशन में 6 माओवादी मारे गए, जिनमें उसका करीबी सहयोगी दिलीप बेदजा भी शामिल था. दिलीप रसद और समन्वय का जिम्मा संभालता था, जिससे पापराव की स्थिति और कमजोर हो गई है. एक अधिकारी के मुताबिक, लगातार ऑपरेशन, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पणों ने माओवादी ढांचे को तोड़ दिया है और स्थानीय समर्थन भी काफी कम हो गया है. ऐसे हालात में पापराव के लिए आत्मसमर्पण ही आखिरी विकल्प था.