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जवानी में किया था गबन,26 साल बाद हुए गिरफ्तार। पढ़ें चौंकाने वाली खबर

Raipur loan ghotala : साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन प्रकरण में ‘आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर’ के तत्कालीन अध्यक्ष एवं ‘सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर’ के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक गिरफ्तार

मुख्य बिंदु :

  • ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 19/2000 में आज दिनांक 18.03.2026 को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
  • यह कार्रवाई 26 साल पुराने प्रकरण में की गई है।
  • प्रकरण में धारा 120बी, 406, 409, 420, 467, 468, 471 भादवि तथा धारा 13 (1) (सी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराध दर्ज है।
  • वर्ष 1995 से 1998 के दौरान जरूरतमंद व्यक्तियों के लिये संचालित सरकारी आवासीय योजना के नाम पर ऋण राशि प्राप्त की गई थी।
  • आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपये, कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया गया।
  • भौतिक सत्यापन में ऋण अभिलेखों में दर्शाए गए स्थलों पर न तो मकान निर्मित पाया गया और न ही संबंधित ऋणधारी वहां मिले।
  • जांच में कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी प्रमाण पत्रों तथा आपराधिक षड्यंत्र के माध्यम से ऋण राशि के गबन किये जाने के तथ्य सामने आये।
  • प्रकरण के अन्य दो नामजद आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।
  • गिरफ्तार आरोपियों को दिनांक 25.03.2026 तक पुलिस रिमाण्ड पर लिया गया है।
  • ब्यूरो द्वारा पुराने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से पुनः परीक्षण में लेकर उनमें आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

Raipur loan ghotala : ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 19/2000, धारा 120बी, 406, 409, 420, 467, 468, 471 भादवि तथा धारा 13 (1) (सी), 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच शासन की सरकारी आवासीय योजना के अंतर्गत जरूरतमंद व्यक्तियों को मकान निर्माण हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी।

जांच में पाया गया कि आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष आरोपी थावरदास माधवानी द्वारा अपनी समिति के 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपये, कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण मध्यप्रदेश सहकारी आवास संघ मर्यादित, क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर से प्राप्त किया गया। ऋण अभिलेखों में गृह निर्माण स्थल ग्राम रायपुरा एवं पंडरीकांचा दर्शाया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर उक्त प्रकरण का सत्यापन कराया गया, किन्तु सत्यापन में भी गलत प्रतिवेदन प्रस्तुत कर निर्माण कार्य पूर्ण होना बताया गया। बाद

में कराये गये भौतिक सत्यापन में उक्त स्थलों पर न तो कोई मकान निर्मित पाया गया और न ही ऋण प्राप्त करने वाले व्यक्ति वहां उपलब्ध मिले।

जांच से यह भी स्पष्ट हुआ कि मध्यप्रदेश सहकारी आवास संघ के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी स्व. ए.ई. ग्रेबियल द्वारा बिना समुचित जांच के ऋण आवेदन स्वीकृ त कर आवास संघ मुख्यालय को अग्रेषित किये गये, जिसके आधार पर ऋण स्वीकृत कराया गया। उनके द्वारा ऋणों के उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा निर्माण के विभिन्न चरणों के पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी किये गये। आरोपी बसंत कुमार साहू, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक, द्वारा भी भवन निर्मित होने का प्रमाण पत्र जारी किया गया।

Raipur loan ghotala : अतः आरोपियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र कर कूटरचित अभिलेखों का उपयोग करते हुए आवास संघ से गृह निर्माण हेतु धोखाधड़ीपूर्वक ऋण स्वीकृत कराया गया तथा राशि 1 करोड़ 86 लाख रुपये का बंदरबांट कर आपस में वितरित कर लिया गया। प्रकरण के अन्य दो नामजद आरोपी अब दिवंगत हो चुके हैं।

Raipur loan ghotala :

गिरफ्तार आरोपियों को पूर्व में कई बार नोटिस तामील करने का प्रयास किया गया, किन्तु वे अपने पते पर नहीं मिले तथा छिपकर रह रहे थे। आज दिनांक 18.03.2026 को प्रकरण में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी एवं सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिनांक 25.03.2026 तक पुलिस रिमाण्ड पर लिया गया है।

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