Chhattisgarh Liquor Scam बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री की करीबी डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. जस्टिस निशांत मिश्रा की सिंगल बेंच ने ED को 20 फरवरी से पहले शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि समय दिया गया तो तय समयसीमा पर सुनवाई असंभव हो जाएगी. यह घोटाला करीब 2,000 करोड़ रुपये का माना जा रहा है, जिसमें अवैध शराब कारोबार, हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं. सौम्या की गिरफ्तारी जनवरी 2026 में ED ने की थी, उसके बाद से वह जेल में हैं. यह सुनवाई शराब घोटाले की जांच को नई गति देगी, क्योंकि ED के जवाब से कोर्ट को मामले की गहराई समझने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश ED पर दबाव बढ़ाएगा और जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा.
Chhattisgarh Liquor Scam
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट को दो सप्ताह के अंदर सुनवाई पूरी करने का समय दिया है, जो 20 फरवरी की समयसीमा से मेल खाता है. शराब घोटाला छत्तीसगढ़ की पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़ा है, जहां शराब वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगा. सौम्या चौरसिया पर मुख्य रूप से दस्तावेजों में हेराफेरी और पैसे के लेन-देन का शक है. ED की जांच से पता चला है कि घोटाले में कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन सौम्या की भूमिका केंद्रीय रही. कोर्ट की यह कार्रवाई न केवल आरोपी को राहत देगी या नकारेगी, बल्कि पूरे केस की दिशा तय करेगी. राजनीतिक हलकों में भी यह सुनवाई चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि यह पूर्व सरकार की छवि पर असर डालेगी. अभियोजन पक्ष का कहना है कि जल्द जवाब से जांच तेज होगी, जबकि बचाव पक्ष इसे न्यायिक देरी का उदाहरण मान रहा है. यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी लड़ाई का प्रतीक बन गया है.
सुनवाई का विवरण: ED की मांग ठुकराई
सोमवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में सौम्या चौरसिया की दो जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई. ED के वकील ने कहा कि जांच पूरी नहीं हुई, इसलिए अतिरिक्त समय चाहिए. लेकिन जस्टिस निशांत मिश्रा ने तर्क दिया कि समयसीमा का पालन जरूरी है. कोर्ट ने ED को 20 फरवरी तक शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया. यदि समय नहीं दिया गया तो सुनवाई तय समय पर नहीं हो पाएगी. यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के दो सप्ताह के समयसीमा से जुड़ा है.
शराब घोटाले में 2,000 करोड़ का कांड
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला 2023 से चर्चा में है. पूर्व सरकार के दौरान शराब लाइसेंस वितरण में भ्रष्टाचार हुआ. ED ने जनवरी 2026 में सौम्या को गिरफ्तार किया. आरोप हैं कि उन्होंने दस्तावेज फर्ज किए और मनी लॉन्ड्रिंग की. घोटाले में कई अधिकारी और व्यापारी नामित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने HC को तेज सुनवाई का निर्देश दिया ताकि न्याय में देरी न हो.
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला 2023 से चर्चा में है. पूर्व सरकार के दौरान शराब लाइसेंस वितरण में भ्रष्टाचार हुआ. ED ने जनवरी 2026 में सौम्या को गिरफ्तार किया. आरोप हैं कि उन्होंने दस्तावेज फर्ज किए और मनी लॉन्ड्रिंग की. घोटाले में कई अधिकारी और व्यापारी नामित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने HC को तेज सुनवाई का निर्देश दिया ताकि न्याय में देरी न हो.
सौम्या चौरसिया की भूमिका: पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी
Chhattisgarh Liquor Scam सौम्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सबसे करीबी डिप्टी सेक्रेटरी रहीं. ED का दावा है कि उन्होंने शराब नीति में हेराफेरी की. गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत की कोशिश की, लेकिन जनवरी में खारिज हो गई. अब नियमित जमानत याचिका पर फोकस है. बचाव पक्ष का कहना है कि राजनीतिक साजिश है.
Chhattisgarh Liquor Scam सौम्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सबसे करीबी डिप्टी सेक्रेटरी रहीं. ED का दावा है कि उन्होंने शराब नीति में हेराफेरी की. गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत की कोशिश की, लेकिन जनवरी में खारिज हो गई. अब नियमित जमानत याचिका पर फोकस है. बचाव पक्ष का कहना है कि राजनीतिक साजिश है.
ED की जांच: क्या उम्मीदें
Chhattisgarh Liquor Scam ED ने शराब कारोबार में 2,000 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा किया है. सौम्या से पूछताछ में कई दस्तावेज बरामद हुए हैं. कोर्ट के निर्देश से ED को जल्द जवाब देना पड़ेगा, जो केस को मजबूत या कमजोर कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच भ्रष्टाचार रोकने में मील का पत्थर साबित होगी.
Chhattisgarh Liquor Scam ED ने शराब कारोबार में 2,000 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा किया है. सौम्या से पूछताछ में कई दस्तावेज बरामद हुए हैं. कोर्ट के निर्देश से ED को जल्द जवाब देना पड़ेगा, जो केस को मजबूत या कमजोर कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच भ्रष्टाचार रोकने में मील का पत्थर साबित होगी.




