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रायपुर में 23 जनवरी से शुरू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, मिलेंगे 16 अधिकार; शस्त्र-आबकारी का पावर नहीं

Police Commissioner System रायपुर। राजधानी रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने जा रही है। विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद गृह विभाग इस संबंध में अधिसूचना जारी करने की तैयारी कर चुका है। उम्मीद की जा रही थी कि शुक्रवार देर रात तक अधिसूचना जारी हो सकती है, लेकिन अब सोमवार को जारी होने की बात कही जा रही है।

Police Commissioner System गृह विभाग के सूत्रों ने बताया कि नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर 16 महत्वपूर्ण अधिकारों से लैस होंगे, जिससे शहर में कानून और व्यवस्था का नियंत्रण अधिक सशक्त होगा। हालांकि, शस्त्र और आबकारी (एक्साइज) लाइसेंस जारी करने का अधिकार कमिश्नर को नहीं मिलेगा।

कमिश्नर को ये मिलेंगे अधिकार

Police Commissioner System पुलिस कमिश्नर को कैदी अधिनियम 1900 के तहत कैदियों को बीमारी या पारिवारिक कारणों से अल्पकालीन पैरोल पर रिहा करने का अधिकार प्राप्त होगा। छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम 2007 के अंतर्गत धरना-प्रदर्शन, जुलूस और सभा की अनुमति देने के साथ धारा 144 लागू करने का अधिकार कमिश्नर को मिलेगा।

विष अधिनियम 1919 के तहत अवैध रूप से जहर रखने या बेचने की शिकायत मिलने पर तलाशी वारंट जारी किया जा सकेगा। जेल अधिनियम 1894 के अंतर्गत जेल में सुरक्षा और अव्यवस्था से जुड़े मामलों में कार्रवाई का अधिकार होगा। देह व्यापार निवारण अधिनियम 1956 के तहत जांच और छापामार कार्रवाई की जा सकेगी।

गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम 1967 के अंतर्गत गैरकानूनी स्थल का प्रबंधन, राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के तहत जिला बदर की कार्रवाई, मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अंतर्गत यातायात निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) 1980 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार भी पुलिस कमिश्नर के पास रहेगा।

इनका भी होगा पावर

इसके अलावा पुलिस में असंतोष फैलाने का अधिनियम 1922, आफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923, देशद्रोही सभा रोकथाम अधिनियम 1911, सिनेमा अधिनियम 1952, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, पेट्रोलियम अधिनियम 1934 और विस्फोटक अधिनियम 1884 के तहत भी पुलिस कमिश्नर सीधे आदेश देने और कार्रवाई करने में सक्षम होंगे।

Police Commissioner System अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था होगी मजबूत

इस व्यवस्था से पुलिस कमिश्नर को कानून व्यवस्था के सभी अहम पहलुओं पर नियंत्रण मिलेगा, जिससे अपराध नियंत्रण, सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। शस्त्र और आबकारी लाइसेंस का अधिकार न मिलने के बावजूद रायपुर पुलिस कमिश्नरी मॉडल से शहर में कानून व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।